📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Savvywriter
बिज़नेस
एनजीटी ने जयपुर के 150 फैक्ट्रियों को 30 दिनों में वन विभाग की जमीन खाली करने का आदेश
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 18 सित. 2026, 04:45 PM
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राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल ने जयपुर में वन विभाग की जमीन पर स्थित लगभग 150 औद्योगिक इकाइयों को 30 दिनों में कब्जा खाली करने का आदेश दिया, जिससे स्थानीय व्यापारियों में असहजता बढ़ी।
राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने जयपुर में वन विभाग की जमीन पर स्थित लगभग 150 फैक्ट्रियों को 30 दिनों के भीतर कब्जा खाली करने का अनिवार्य आदेश जारी किया है। यह आदेश उन औद्योगिक इकाइयों की वैधता को लेकर चल रहे विवाद के बाद आया है, जिनका संचालन पर्यावरणीय संरक्षण के नियमों के विरुद्ध माना गया है।
इन इकाइयों में छोटे स्तर के निर्माण से लेकर बड़े प्रसंस्करण प्लांट तक शामिल हैं, जो शहर के औद्योगिक उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। व्यापारियों को अब अपनी गतिविधियों को स्थानांतरित करने या वैकल्पिक व्यवस्था खोजने के लिए कम समय दिया गया है, जिससे उत्पादन में रुकावट और आर्थिक नुकसान का डर बढ़ रहा है।
उद्योग प्रतिनिधियों ने इस त्वरित समयसीमा को लेकर चिंता जताई है, यह बताते हुए कि कई इकाइयों ने वर्षों तक अनौपचारिक अनुमति के साथ काम किया है। वे वर्तमान में कानूनी उपायों और राज्य वन विभाग के साथ भूमि बदलने या मुआवजे की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं, पर अभी तक कोई औपचारिक प्रस्ताव सामने नहीं आया है।
यह आदेश भारत में वन‑भूमि उपयोग नियमों के कड़ाई से पालन को दर्शाता है। राजस्थान की प्राधिकरणों से उम्मीद की जा रही है कि वे अनुपालन की कड़ी निगरानी करेंगे, जबकि प्रभावित उद्यमी इस फैसले के कारण उत्पन्न होने वाली संचालन संबंधी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो रहे हैं।
इन इकाइयों में छोटे स्तर के निर्माण से लेकर बड़े प्रसंस्करण प्लांट तक शामिल हैं, जो शहर के औद्योगिक उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। व्यापारियों को अब अपनी गतिविधियों को स्थानांतरित करने या वैकल्पिक व्यवस्था खोजने के लिए कम समय दिया गया है, जिससे उत्पादन में रुकावट और आर्थिक नुकसान का डर बढ़ रहा है।
उद्योग प्रतिनिधियों ने इस त्वरित समयसीमा को लेकर चिंता जताई है, यह बताते हुए कि कई इकाइयों ने वर्षों तक अनौपचारिक अनुमति के साथ काम किया है। वे वर्तमान में कानूनी उपायों और राज्य वन विभाग के साथ भूमि बदलने या मुआवजे की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं, पर अभी तक कोई औपचारिक प्रस्ताव सामने नहीं आया है।
यह आदेश भारत में वन‑भूमि उपयोग नियमों के कड़ाई से पालन को दर्शाता है। राजस्थान की प्राधिकरणों से उम्मीद की जा रही है कि वे अनुपालन की कड़ी निगरानी करेंगे, जबकि प्रभावित उद्यमी इस फैसले के कारण उत्पन्न होने वाली संचालन संबंधी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो रहे हैं।