📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Uemk
शिक्षा
राजस्थान के तीन विश्वविद्यालयों में नए कुलगुरु नियुक्त
✍️ Amar Ujala · Jaipur
🗓 25 सित. 2026, 12:31 PM
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राजस्थान विश्वविद्यालय, शेखावाटी विश्वविद्यालय और एमजीएसयू बीकानेर ने क्रमशः भगवती प्रसाद सारस्वत, युद्धवीर सिंह और नरसी राम विश्नोई को नए कुलगुरु नियुक्त किया है।
राज्य सरकार ने राजस्थान के तीन प्रमुख विश्वविद्यालयों में नई नेतृत्व नियुक्ति की घोषणा की है। भगवती प्रसाद सारस्वत को राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलगुरु, युद्धवीर सिंह को शेखावाटी विश्वविद्यालय के कुलगुरु और नरसी राम विश्नोई को बीकानेर स्थित महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमजीएसयू) के कुलगुरु नियुक्त किया गया है।
इन सभी नियुक्तियों में उनके शैक्षणिक और प्रशासनिक अनुभव को प्रमुख माना गया है। सारस्वत, जो एक अनुभवी विद्वान हैं, से उम्मीद की जा रही है कि वे राजस्थान विश्वविद्यालय को पाठ्यक्रम आधुनिकीकरण और अनुसंधान विस्तार की दिशा में ले जाएँगे। शेखावाटी विश्वविद्यालय के कुलगुरु बने युद्धवीर सिंह, जो क्षेत्रीय विकास अध्ययन में विशेषज्ञ हैं, विश्वविद्यालय के शेखावाटी क्षेत्र में पहुँच को विस्तारित करेंगे। नरसी राम विश्नोई, जो कृषि विज्ञान में विशेषज्ञ हैं, एमजीएसयू में कृषि नवाचार और किसान‑उन्मुख अनुसंधान को सुदृढ़ करेंगे।
इन नियुक्तियों को राज्य के उच्च शिक्षा स्तर को सुदृढ़ करने की व्यापक पहल के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। विश्वविद्यालय परिषदों और उच्च शिक्षा विभाग ने बताया है कि नए कुलगुरुओं को शैक्षणिक मानकों में सुधार, उद्योग के साथ सहयोग बढ़ाने और छात्र सेवाओं को बेहतर बनाने के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा।
इन सभी नियुक्तियों में उनके शैक्षणिक और प्रशासनिक अनुभव को प्रमुख माना गया है। सारस्वत, जो एक अनुभवी विद्वान हैं, से उम्मीद की जा रही है कि वे राजस्थान विश्वविद्यालय को पाठ्यक्रम आधुनिकीकरण और अनुसंधान विस्तार की दिशा में ले जाएँगे। शेखावाटी विश्वविद्यालय के कुलगुरु बने युद्धवीर सिंह, जो क्षेत्रीय विकास अध्ययन में विशेषज्ञ हैं, विश्वविद्यालय के शेखावाटी क्षेत्र में पहुँच को विस्तारित करेंगे। नरसी राम विश्नोई, जो कृषि विज्ञान में विशेषज्ञ हैं, एमजीएसयू में कृषि नवाचार और किसान‑उन्मुख अनुसंधान को सुदृढ़ करेंगे।
इन नियुक्तियों को राज्य के उच्च शिक्षा स्तर को सुदृढ़ करने की व्यापक पहल के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। विश्वविद्यालय परिषदों और उच्च शिक्षा विभाग ने बताया है कि नए कुलगुरुओं को शैक्षणिक मानकों में सुधार, उद्योग के साथ सहयोग बढ़ाने और छात्र सेवाओं को बेहतर बनाने के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा।