📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Yann (talk)
विदेश
न्यू दिल्ली घोषणा ने ब्रिक्स में ग्लोबल साउथ एजेंडा तय किया
✍️ Vajiram & Ravi
🗓 14 सित. 2026, 09:02 AM
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न्यू दिल्ली से जारी की गई घोषणा में अगले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ग्लोबल साउथ एजेंडा को आगे बढ़ाने की रूपरेखा दी गई है, जैसा कि वजीरम एंड रवि ने बताया।
न्यू दिल्ली से "न्यू दिल्ली घोषणा" नामक एक आधिकारिक दस्तावेज़ जारी किया गया, जिसमें ब्रिक्स ढाँचे के भीतर ग्लोबल साउथ के लिए एक समन्वित एजेंडा रेखांकित किया गया है। यह घोषणा कानूनी सलाहकार फर्म वजीरम एंड रवि द्वारा जारी की गई, जिसमें विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया।
दस्तावेज़ में व्यापार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, जलवायु वित्त और न्यायसंगत शासन जैसे क्षेत्रों में सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया गया है, और आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में इस एजेंडा को एकजुट रूप से प्रस्तुत करने की बात कही गई है। साथ ही यह ब्रिक्स पहलों को ग्लोबल साउथ राष्ट्रों की व्यापक आकांक्षाओं के साथ संरेखित करने की महत्ता पर बल देता है।
हालांकि घोषणा में कोई नया नीति उपाय नहीं दिया गया, लेकिन यह अगले ब्रिक्स बैठक में नेताओं द्वारा चर्चा किए जाने वाले विषयों को दिशा देने का प्रयास करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा दस्तावेज़ ब्लॉक के कूटनीतिक एजेंडे को प्रभावित कर सकता है और विकासशील देशों के हितों के प्रति अधिक समन्वित दृष्टिकोण का संकेत दे सकता है।
वजीरम एंड रवि, जो अंतर्राष्ट्रीय कानूनी और नीति मामलों में अपनी भूमिका के लिए जानी जाती है, ने कहा कि यह घोषणा कई भारतीय हितधारकों के बीच सहमति को दर्शाती है और ब्रिक्स संवाद में रचनात्मक योगदान देने का उद्देश्य रखती है।
दस्तावेज़ में व्यापार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, जलवायु वित्त और न्यायसंगत शासन जैसे क्षेत्रों में सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया गया है, और आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में इस एजेंडा को एकजुट रूप से प्रस्तुत करने की बात कही गई है। साथ ही यह ब्रिक्स पहलों को ग्लोबल साउथ राष्ट्रों की व्यापक आकांक्षाओं के साथ संरेखित करने की महत्ता पर बल देता है।
हालांकि घोषणा में कोई नया नीति उपाय नहीं दिया गया, लेकिन यह अगले ब्रिक्स बैठक में नेताओं द्वारा चर्चा किए जाने वाले विषयों को दिशा देने का प्रयास करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा दस्तावेज़ ब्लॉक के कूटनीतिक एजेंडे को प्रभावित कर सकता है और विकासशील देशों के हितों के प्रति अधिक समन्वित दृष्टिकोण का संकेत दे सकता है।
वजीरम एंड रवि, जो अंतर्राष्ट्रीय कानूनी और नीति मामलों में अपनी भूमिका के लिए जानी जाती है, ने कहा कि यह घोषणा कई भारतीय हितधारकों के बीच सहमति को दर्शाती है और ब्रिक्स संवाद में रचनात्मक योगदान देने का उद्देश्य रखती है।