📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Yann (talk)
मनोरंजन
नई दिल्ली में प्रदर्शनी: कलाकार के अरुणाचल के बचपन के दृश्य
✍️ Architect and Interiors India
🗓 22 अग. 2026, 10:36 AM
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नई दिल्ली में आयोजित प्रदर्शनी में कलाकार के अरुणाचल के बचपन के दृश्यों को दर्शाने वाली कृतियों को प्रस्तुत किया गया है।
नई दिल्ली के एक समकालीन कला केंद्र ने इस सप्ताह एक व्यक्तिगत प्रदर्शनी का उद्घाटन किया, जिसमें अरुणाचल प्रदेश के दूरस्थ दृश्यों को शहरी दर्शकों तक पहुँचाया गया है। आर्किटेक्ट एंड इंटीरियर्स इंडिया द्वारा क्यूरेट की गई यह प्रदर्शनी लोधी रोड पर स्थित गैलरी 101 में तीन हफ्तों तक चलेगी, जिसमें तेल और मिश्रित माध्यम की कई कृतियाँ प्रदर्शित होंगी।
कलाकार, जो पूर्वी हिमालय की पहाड़ियों में बड़े हुए, अपने बचपन की धुंधली घाटियों, तेज़ धारा वाले नदियों और जनजातीय गाँवों की यादों को अपने काम में उतारते हैं। दिल्ली में औपचारिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कैनवास के माध्यम से अपने मूलभूत संस्कृति को संजोने का प्रयास किया है।
प्रदर्शित कृतियों में सूर्योदय के रंगों से सजी विस्तृत परिदृश्य से लेकर स्थानीय वनस्पति के सूक्ष्म अध्ययन तक शामिल हैं। समीक्षकों ने इन कार्यों की सूक्ष्म रंगपट्टी और परतदार बनावट को सराहा, जो स्मृति और समकालीन संवेदना दोनों को व्यक्त करती है। दर्शकों ने इस प्रदर्शनी को भारत के उत्तर‑पूर्वी क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय मंच पर लाने के प्रयास के रूप में सराहा है।
प्रदर्शनी में एक छोटा डॉक्यूमेंट्री भी दिखाया गया है, जो कलाकार की दूरदराज़ अरुणाचल के गाँवों से राष्ट्रीय कला परिदृश्य तक की यात्रा को दर्शाता है, और भारत के विभिन्न क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक संवाद को उजागर करता है।
कलाकार, जो पूर्वी हिमालय की पहाड़ियों में बड़े हुए, अपने बचपन की धुंधली घाटियों, तेज़ धारा वाले नदियों और जनजातीय गाँवों की यादों को अपने काम में उतारते हैं। दिल्ली में औपचारिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कैनवास के माध्यम से अपने मूलभूत संस्कृति को संजोने का प्रयास किया है।
प्रदर्शित कृतियों में सूर्योदय के रंगों से सजी विस्तृत परिदृश्य से लेकर स्थानीय वनस्पति के सूक्ष्म अध्ययन तक शामिल हैं। समीक्षकों ने इन कार्यों की सूक्ष्म रंगपट्टी और परतदार बनावट को सराहा, जो स्मृति और समकालीन संवेदना दोनों को व्यक्त करती है। दर्शकों ने इस प्रदर्शनी को भारत के उत्तर‑पूर्वी क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय मंच पर लाने के प्रयास के रूप में सराहा है।
प्रदर्शनी में एक छोटा डॉक्यूमेंट्री भी दिखाया गया है, जो कलाकार की दूरदराज़ अरुणाचल के गाँवों से राष्ट्रीय कला परिदृश्य तक की यात्रा को दर्शाता है, और भारत के विभिन्न क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक संवाद को उजागर करता है।