📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Manoj Karingamadathil
खेल
2026 का नेहरू ट्रॉफी नाव रेस आज पन्नामड्डा लेक में शुरू
✍️ Onmanorama
🗓 22 अग. 2026, 08:38 AM
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पन्नामड्डा लेक, अलप्पुज़ा में आज नेहरू ट्रॉफी नाव रेस शुरू, जहाँ पारंपरिक सर्पनौकाएँ ट्रॉफी के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगी।
केरल के अलप्पुज़ा में आज पन्नामड्डा लेक पर 2026 का नेहरू ट्रॉफी नाव रेस शुरू होने वाला है, जहाँ पारंपरिक सर्पनौकाएँ इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता में भाग लेंगी। यह रेस राज्य के सांस्कृतिक कैलेंडर में एक प्रमुख स्थान रखती है और विभिन्न क्षेत्रों के नाविक प्रतिष्ठित नेहरू ट्रॉफी के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे।
यह प्रतियोगिता केवल खेल नहीं, बल्कि एक बड़ा पर्यटन आकर्षण भी है; हजारों दर्शक लेक के किनारे इकट्ठा होकर ड्रम की थाप और पैडल की गड़गड़ाहट का आनंद लेंगे। स्थानीय व्यापारियों ने भी इस भीड़ के लिए तैयारी कर ली है, जिससे रेस की आर्थिक और सांस्कृतिक महत्ता स्पष्ट होती है।
आयोजकों ने बताया है कि रेस दोपहर के शुरुआती समय में शुरू होगी, जिसमें एक छोटा समारोह होगा जिसमें सुरक्षा और सुहावने मौसम की कामना की जाएगी। पारंपरिक नियमों के तहत सर्पनौकाएँ लेक के घुमावदार मार्ग पर प्रतिस्पर्धा करेंगी, और जजों की निगरानी में परिणाम तय होगा।
नावों के लाइन‑अप के साथ माहौल उत्साह से भर गया है, जो केरल की जलयात्रा परंपरा और सामुदायिक एकजुटता को दर्शाता है। गति और समन्वय से तय होगा कौन सी टीम नेहरू ट्रॉफी को उठाएगी।
2026 का रेस आठ दशकों से चल रही इस परंपरा को जारी रखता है, जिससे केरल के नाव रेसिंग की आकर्षण और क्षेत्रीय एकता का प्रमाण मिलता है।
यह प्रतियोगिता केवल खेल नहीं, बल्कि एक बड़ा पर्यटन आकर्षण भी है; हजारों दर्शक लेक के किनारे इकट्ठा होकर ड्रम की थाप और पैडल की गड़गड़ाहट का आनंद लेंगे। स्थानीय व्यापारियों ने भी इस भीड़ के लिए तैयारी कर ली है, जिससे रेस की आर्थिक और सांस्कृतिक महत्ता स्पष्ट होती है।
आयोजकों ने बताया है कि रेस दोपहर के शुरुआती समय में शुरू होगी, जिसमें एक छोटा समारोह होगा जिसमें सुरक्षा और सुहावने मौसम की कामना की जाएगी। पारंपरिक नियमों के तहत सर्पनौकाएँ लेक के घुमावदार मार्ग पर प्रतिस्पर्धा करेंगी, और जजों की निगरानी में परिणाम तय होगा।
नावों के लाइन‑अप के साथ माहौल उत्साह से भर गया है, जो केरल की जलयात्रा परंपरा और सामुदायिक एकजुटता को दर्शाता है। गति और समन्वय से तय होगा कौन सी टीम नेहरू ट्रॉफी को उठाएगी।
2026 का रेस आठ दशकों से चल रही इस परंपरा को जारी रखता है, जिससे केरल के नाव रेसिंग की आकर्षण और क्षेत्रीय एकता का प्रमाण मिलता है।