Crime
नवादा में ऑनलाइन लोन धोखाधड़ी के पाँच आरोपी गिरफ्तार, 8 मोबाइल व फर्जी सिम बरामद
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वारिसलीगंज थाना ने मीरचक चमरटोली गांव में छापेमारी कर ऑनलाइन लोन का झांसा देकर साइबर ठगी करने वाले पाँच अपराधियों को गिरफ्तार किया, साथ ही आठ मोबाइल फोन और एक फर्जी सिम बरामद की गई।
वारिसलीगंज थाना पुलिस ने मीरचक चमरटोली गांव में आयोजित छापेमारी में पाँच साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया और उनके पास से आठ एंड्रॉयड मोबाइल फोन तथा एक फर्जी सिम बरामद की। यह कार्रवाई मंगलवार को वारिसलीगंज थाना में आयोजित प्रेस वार्ता में एसडीपीओ सुजय विद्यार्थी ने बताई, जहाँ उन्होंने बताया कि 7 सितंबर को पुलिस को सूचना मिलने पर एसपी के निर्देश पर विशेष टीम बनाकर तुरंत छापेमारी की गई।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान केदार रविदास के 26 वर्षीय पुत्र जोगेंद्र दास, रविंद्र रविदास के 20 वर्षीय पुत्र गौतम कुमार, राजेंद्र रविदास के 26 वर्षीय पुत्र टुन्टुन कुमार, काली रविदास के 32 वर्षीय पुत्र प्रकाश दास तथा नरेश रविदास के 30 वर्षीय पुत्र धर्मेंद्र रविदास के रूप में हुई। इन पाँचों ने बजाज फाइनेंस, रिलायंस फाइनेंस आदि कंपनियों के नाम पर कम ब्याज दर का ऑनलाइन लोन दिलाने का झांसा देकर लोगों को धोखा दिया।
आरोपियों ने कस्टमर केयर, फेसबुक आदि माध्यमों से पीड़ितों के मोबाइल नंबर प्राप्त कर उन्हें फोन किया, स्वयं को बैंक मैनेजर या कंपनी कर्मचारी बताकर भरोसा स्थापित किया। इसके बाद आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, पासपोर्ट‑साइज़ फोटो और ई‑मेल आईडी जैसी निजी जानकारी लेकर प्रोसेसिंग फीस व अन्य शुल्क के नाम पर कई किस्तों में रकम वसूल की।
पुलिस ने बरामद मोबाइल और फर्जी सिम के आधार पर इस साइबर ठगी से जुड़े अन्य मामलों की भी जांच शुरू कर दी है। सभी गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और आगे की कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान केदार रविदास के 26 वर्षीय पुत्र जोगेंद्र दास, रविंद्र रविदास के 20 वर्षीय पुत्र गौतम कुमार, राजेंद्र रविदास के 26 वर्षीय पुत्र टुन्टुन कुमार, काली रविदास के 32 वर्षीय पुत्र प्रकाश दास तथा नरेश रविदास के 30 वर्षीय पुत्र धर्मेंद्र रविदास के रूप में हुई। इन पाँचों ने बजाज फाइनेंस, रिलायंस फाइनेंस आदि कंपनियों के नाम पर कम ब्याज दर का ऑनलाइन लोन दिलाने का झांसा देकर लोगों को धोखा दिया।
आरोपियों ने कस्टमर केयर, फेसबुक आदि माध्यमों से पीड़ितों के मोबाइल नंबर प्राप्त कर उन्हें फोन किया, स्वयं को बैंक मैनेजर या कंपनी कर्मचारी बताकर भरोसा स्थापित किया। इसके बाद आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, पासपोर्ट‑साइज़ फोटो और ई‑मेल आईडी जैसी निजी जानकारी लेकर प्रोसेसिंग फीस व अन्य शुल्क के नाम पर कई किस्तों में रकम वसूल की।
पुलिस ने बरामद मोबाइल और फर्जी सिम के आधार पर इस साइबर ठगी से जुड़े अन्य मामलों की भी जांच शुरू कर दी है। सभी गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और आगे की कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी।