📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Nskjnv
स्थानीय
नरायंकहेड के गाँव ने एल निनो से निपटने के लिए वर्षा जल संचयन पहले ही शुरू किया
✍️ Telangana Today
🗓 22 जुल. 2026, 04:48 PM
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नरायंकहेड क्षेत्र के तीन गाँवों ने एल निनो के प्रभाव से निपटने के लिए वर्षा जल संचयन शुरू कर दिया है, जबकि राज्य सरकार अभी तक कोई योजना नहीं बना पाई है।
नरायंकहेड क्षेत्र के तीन गाँव—कोंडापुर, गोपालपुर और येल्लापल्ले—ने एल निनो के प्रभाव से निपटने के लिए वर्षा जल संचयन प्रणालियाँ स्थापित की हैं।
एल निनो, एक जलवायु पैटर्न है जो भारत के कुछ हिस्सों में असामान्य रूप से सूखा लाता है, जिससे सिंचाई और पीने के पानी की कमी की चिंता बढ़ गई है। स्थानीय नेताओं का कहना है कि नई वर्षा जल टैंकों से वर्षा के दौरान निकासी को संग्रहित करके सूखे महीनों में उपयोग किया जाएगा।
गाँवों ने 50,000‑लीटर के कंक्रीट क़िस्से और छतों व खेतों से वर्षा जल इकट्ठा करने के लिए चैनल बनाए हैं। गाँव के प्रमुख के अनुसार, यह परियोजना सामुदायिक प्रयास और एक स्थानीय एनजीओ से मिले छोटे अनुदान के साथ पूरी हुई।
जबकि तेलंगाना सरकार ने अभी तक राज्यव्यापी एल निनो शमन योजना जारी नहीं की है, नरायंकहेड में यह पहल दिखाती है कि जमीनी स्तर पर उठाए गए कदम तात्कालिक राहत प्रदान कर सकते हैं।
एल निनो, एक जलवायु पैटर्न है जो भारत के कुछ हिस्सों में असामान्य रूप से सूखा लाता है, जिससे सिंचाई और पीने के पानी की कमी की चिंता बढ़ गई है। स्थानीय नेताओं का कहना है कि नई वर्षा जल टैंकों से वर्षा के दौरान निकासी को संग्रहित करके सूखे महीनों में उपयोग किया जाएगा।
गाँवों ने 50,000‑लीटर के कंक्रीट क़िस्से और छतों व खेतों से वर्षा जल इकट्ठा करने के लिए चैनल बनाए हैं। गाँव के प्रमुख के अनुसार, यह परियोजना सामुदायिक प्रयास और एक स्थानीय एनजीओ से मिले छोटे अनुदान के साथ पूरी हुई।
जबकि तेलंगाना सरकार ने अभी तक राज्यव्यापी एल निनो शमन योजना जारी नहीं की है, नरायंकहेड में यह पहल दिखाती है कि जमीनी स्तर पर उठाए गए कदम तात्कालिक राहत प्रदान कर सकते हैं।