📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Home Affairs
अपराध
मध्य प्रदेश में नायब तहसीलदार और प्राइवेट क्लर्क को लोकायुक्त ने पकड़ा
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 17 सित. 2026, 07:45 PM
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मध्य प्रदेश के नायब तहसीलदार और उनके द्वारा नियुक्त प्राइवेट क्लर्क, जो रिश्वत इकट्ठा करते थे, को लोकायुक्त की जाँच में पकड़ा गया।
मध्य प्रदेश के लोकायुक्त ने खुलासा किया कि नायब तहसीलदार ने एक प्राइवेट क्लर्क को रिश्वत एकत्र करने के लिए नियुक्त किया था। जांच में पता चला कि क्लर्क को अधिकारी की ओर से अवैध भुगतान लेने का काम सौंपा गया था, जो भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों का उल्लंघन है।
प्राधिकरणों ने दोनों अधिकारियों को जोड़ने वाला दस्तावेजी सबूत बरामद किया और राज्य के भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की। नायब तहसीलदार और प्राइवेट क्लर्क को आगे की पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया गया है।
यह मामला लोकायुक्त की सार्वजनिक सेवकों के दुरुपयोग को रोकने की कड़ी निगरानी को उजागर करता है। जिला प्रशासन के अधिकारियों को जांच में पूर्ण सहयोग करने का निर्देश दिया गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि प्राइवेट क्लर्क की भागीदारी सार्वजनिक अधिकारी को जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करती, क्योंकि अदालत ने पहले भी कहा है कि रिश्वत में सहायता करना दंडनीय अपराध है।
लोकायुक्त ने कहा है कि इस मामले की सुनवाई को तेज़ किया जाएगा ताकि राज्य की नौकरशाही में इस प्रकार की अनैतिक प्रथा को रोका जा सके।
प्राधिकरणों ने दोनों अधिकारियों को जोड़ने वाला दस्तावेजी सबूत बरामद किया और राज्य के भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की। नायब तहसीलदार और प्राइवेट क्लर्क को आगे की पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया गया है।
यह मामला लोकायुक्त की सार्वजनिक सेवकों के दुरुपयोग को रोकने की कड़ी निगरानी को उजागर करता है। जिला प्रशासन के अधिकारियों को जांच में पूर्ण सहयोग करने का निर्देश दिया गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि प्राइवेट क्लर्क की भागीदारी सार्वजनिक अधिकारी को जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करती, क्योंकि अदालत ने पहले भी कहा है कि रिश्वत में सहायता करना दंडनीय अपराध है।
लोकायुक्त ने कहा है कि इस मामले की सुनवाई को तेज़ किया जाएगा ताकि राज्य की नौकरशाही में इस प्रकार की अनैतिक प्रथा को रोका जा सके।