Agriculture
नहर में कम पानी से 20 एकड़ में धान की रोपनी प्रभावित
अब फूल के खेती की तैयारी में लगें किसान
पटना जिला अंतर्गत दुल्हिन बाजार प्रखंड के सिंघाड़ा कोपा गांव के समीप रही मौजा में सिंचाई की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण करीब 20 एकड़ कृषि योग्य भूमि पर इस वर्ष धान की रोपनी प्रभावित हुई है। नहर में पर्याप्त पानी नहीं आने के कारण ऊंचाई पर स्थित खेतों तक पानी नहीं पहुंच सका। इससे किसान समय पर धान की रोपनी नहीं कर पाए और बड़ी मात्रा में कृषि भूमि खाली रह गई। अब किसान इन खेतों में धान की जगह फूल की खेती करने की तैयारी में जुट गए हैं।
स्थानीय किसान अवधेश कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार नहर में पानी काफी कम आया। इसके कारण किसानों को धान के खेतों की सिंचाई करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। नहर से पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण कई किसान धान की रोपनी नहीं कर सके। मजबूरी में अब खाली पड़ी जमीन पर फूल की खेती करने का निर्णय लिया गया है, ताकि खेती से होने वाली आमदनी का कोई विकल्प मिल सके।
वहीं, किसान रमेश यादव ने बताया कि नहरों की लंबे समय से उड़ाही नहीं होने के कारण जगह-जगह गाद जमा हो गई है। इससे नहर की जल प्रवाह क्षमता प्रभावित हुई और पानी खेतों तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच सका। खासकर ऊंचाई वाले खेतों के किसानों को सिंचाई की समस्या का अधिक सामना करना पड़ा।
किसानों का कहना है कि समय रहते नहर की उड़ाही और पर्याप्त पानी की व्यवस्था की जाती तो धान की रोपनी प्रभावित नहीं होती। किसानों ने संबंधित विभाग से नहरों की नियमित सफाई कराने और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सिंचाई की समस्या का स्थायी समाधान होने से क्षेत्र में कृषि उत्पादन बढ़ेगा और किसानों को आर्थिक नुकसान से राहत मिलेगी।
स्थानीय किसान अवधेश कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार नहर में पानी काफी कम आया। इसके कारण किसानों को धान के खेतों की सिंचाई करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। नहर से पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण कई किसान धान की रोपनी नहीं कर सके। मजबूरी में अब खाली पड़ी जमीन पर फूल की खेती करने का निर्णय लिया गया है, ताकि खेती से होने वाली आमदनी का कोई विकल्प मिल सके।
वहीं, किसान रमेश यादव ने बताया कि नहरों की लंबे समय से उड़ाही नहीं होने के कारण जगह-जगह गाद जमा हो गई है। इससे नहर की जल प्रवाह क्षमता प्रभावित हुई और पानी खेतों तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच सका। खासकर ऊंचाई वाले खेतों के किसानों को सिंचाई की समस्या का अधिक सामना करना पड़ा।
किसानों का कहना है कि समय रहते नहर की उड़ाही और पर्याप्त पानी की व्यवस्था की जाती तो धान की रोपनी प्रभावित नहीं होती। किसानों ने संबंधित विभाग से नहरों की नियमित सफाई कराने और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सिंचाई की समस्या का स्थायी समाधान होने से क्षेत्र में कृषि उत्पादन बढ़ेगा और किसानों को आर्थिक नुकसान से राहत मिलेगी।