📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Bhrigu bayan
कृषि
नागालैंड में पारम्परिक बीज विरासत को मिला नया जीवन
✍️ Eastern Mirror
🗓 26 अग. 2026, 04:33 AM
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नागालैंड की पारम्परिक बीज किस्मों को स्थानीय पहलों के माध्यम से पुनर्जीवित किया जा रहा है, जिससे कृषि विविधता सुरक्षित रहेगी।
नागालैंड के किसान और कृषि कार्यकर्ता पारम्परिक बीज किस्मों को पुनर्जीवित करने के लिए एक सामूहिक पहल शुरू कर चुके हैं, जिसे नागा बीज विरासत को नया जीवन मिला है कहा जा रहा है। इस प्रयास में पीढ़ियों से tribal समुदायों द्वारा उगाए जाने वाले मूल बीजों को इकट्ठा, संरक्षित और पुनः उगाना शामिल है।
इन विरासत बीजों को बचाना जैव विविधता को बनाए रखने, जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन बढ़ाने और नागालैंड की पहाड़ी कृषि से जुड़ी सांस्कृतिक ज्ञान को संरक्षित करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये स्थानीय किस्में अक्सर स्थानीय मिट्टी और मौसम के अनुकूल विशेषताएँ रखती हैं, जो व्यावसायिक हाइब्रिडों से बेहतर होती हैं।
इस कार्यक्रम में सामुदायिक बीज भंडार स्थापित करना, किसान फ़ील्ड स्कूल आयोजित करना और गाँवों के बीच बीज का आदान‑प्रदान सुलभ करना शामिल है। गैर‑सरकारी संगठनों और राज्य कृषि विभाग की तकनीकी सहायता व सीमित वित्तीय सहयोग इस बीज‑संरक्षण कार्य को समर्थन दे रहा है।
हितधारक आशा करते हैं कि पुनर्जीवित बीज विरासत न केवल स्थानीय परिवारों की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि नागालैंड की अनोखी कृषि‑सांस्कृतिक पहचान को दर्शाने वाले ऑर्गेनिक उत्पादों के लिए बाजार अवसर भी पैदा करेगी।
इन विरासत बीजों को बचाना जैव विविधता को बनाए रखने, जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन बढ़ाने और नागालैंड की पहाड़ी कृषि से जुड़ी सांस्कृतिक ज्ञान को संरक्षित करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये स्थानीय किस्में अक्सर स्थानीय मिट्टी और मौसम के अनुकूल विशेषताएँ रखती हैं, जो व्यावसायिक हाइब्रिडों से बेहतर होती हैं।
इस कार्यक्रम में सामुदायिक बीज भंडार स्थापित करना, किसान फ़ील्ड स्कूल आयोजित करना और गाँवों के बीच बीज का आदान‑प्रदान सुलभ करना शामिल है। गैर‑सरकारी संगठनों और राज्य कृषि विभाग की तकनीकी सहायता व सीमित वित्तीय सहयोग इस बीज‑संरक्षण कार्य को समर्थन दे रहा है।
हितधारक आशा करते हैं कि पुनर्जीवित बीज विरासत न केवल स्थानीय परिवारों की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि नागालैंड की अनोखी कृषि‑सांस्कृतिक पहचान को दर्शाने वाले ऑर्गेनिक उत्पादों के लिए बाजार अवसर भी पैदा करेगी।