📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office, Government of India
राजनीति
नागालैंड के राज्यपाल ने बसंत उत्सव में आदिवासी संस्कृति के संरक्षण की अपील की
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🗓 16 सित. 2026, 04:31 PM
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राज्यपाल नंद किशोर यादव ने बसंत उत्सव के अवसर पर नागालैंड की आदिवासी परम्पराओं के संरक्षण की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
नागालैंड में आयोजित बसंत उत्सव के दौरान राज्यपाल नंद किशोर यादव ने जनजातीय नेताओं, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं और अधिकारियों के समक्ष संबोधित किया। उन्होंने राज्य की समृद्ध आदिवासी विरासत—भाषाएँ, कला रूप और परम्पराएँ—के संरक्षण की तात्कालिकता पर बल दिया।
गवर्नर ने बताया कि तेज़ी से हो रहे आधुनिकीकरण और बाहरी प्रभाव इन परम्पराओं को खतरे में डाल रहे हैं, इसलिए सरकारी एजेंसियों और समुदायों को मिलकर दस्तावेज़ीकरण व प्रचार कार्यों को सुदृढ़ करना चाहिए। उन्होंने शैक्षणिक कार्यक्रमों में जनजातीय ज्ञान को शामिल करने और प्रामाणिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को मंच देने का आग्रह किया।
यादव ने यह भी कहा कि सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण सामाजिक एकता और आर्थिक विकास, विशेषकर पर्यटन के लिए आवश्यक है। उन्होंने नीति निर्माताओं से विरासत संरक्षण परियोजनाओं के लिए संसाधन आवंटित करने और जनजातीय शिल्पकारों के बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा करने का अनुरोध किया।
स्थानीय प्रतिनिधियों ने राज्यपाल के बयानों का स्वागत किया और बताया कि पारम्परिक संगीत व नृत्य को पुनर्जीवित करने के प्रयास गति पकड़ रहे हैं। उन्होंने प्रशासन के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने का संकल्प लिया कि बसंत उत्सव सांस्कृतिक गर्व का मंच बना रहे।
यह टिप्पणी उस समय आई है जब कई पूर्वोत्तर राज्यों में सांस्कृतिक नीतियों की पुनरावलोकन प्रक्रिया चल रही है, जो भारत की विविध आदिवासी समुदायों के संरक्षण पर राष्ट्रीय ध्यान को दर्शाती है।
गवर्नर ने बताया कि तेज़ी से हो रहे आधुनिकीकरण और बाहरी प्रभाव इन परम्पराओं को खतरे में डाल रहे हैं, इसलिए सरकारी एजेंसियों और समुदायों को मिलकर दस्तावेज़ीकरण व प्रचार कार्यों को सुदृढ़ करना चाहिए। उन्होंने शैक्षणिक कार्यक्रमों में जनजातीय ज्ञान को शामिल करने और प्रामाणिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को मंच देने का आग्रह किया।
यादव ने यह भी कहा कि सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण सामाजिक एकता और आर्थिक विकास, विशेषकर पर्यटन के लिए आवश्यक है। उन्होंने नीति निर्माताओं से विरासत संरक्षण परियोजनाओं के लिए संसाधन आवंटित करने और जनजातीय शिल्पकारों के बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा करने का अनुरोध किया।
स्थानीय प्रतिनिधियों ने राज्यपाल के बयानों का स्वागत किया और बताया कि पारम्परिक संगीत व नृत्य को पुनर्जीवित करने के प्रयास गति पकड़ रहे हैं। उन्होंने प्रशासन के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने का संकल्प लिया कि बसंत उत्सव सांस्कृतिक गर्व का मंच बना रहे।
यह टिप्पणी उस समय आई है जब कई पूर्वोत्तर राज्यों में सांस्कृतिक नीतियों की पुनरावलोकन प्रक्रिया चल रही है, जो भारत की विविध आदिवासी समुदायों के संरक्षण पर राष्ट्रीय ध्यान को दर्शाती है।