📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
राजनीति
नागा समूहों ने मणिपुर संकट के समाधान के लिए मोदी से की राजनीतिक अपील
✍️ The Hindu
🗓 06 नव. 2026, 02:01 AM
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नागा संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मणिपुर में चल रहे संकट का राजनीतिक समाधान देने की अपील की।
नागा नागरिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक औपचारिक याचिका सौंपते हुए मणिपुर में जारी अस्थिरता का राजनीतिक समाधान माँगा। इस याचिका में हिंसा के निरंतर प्रभाव और स्थानीय जनसंख्या पर पड़ने वाले मानवीय संकट को रेखांकित किया गया है।
मणिपुर संकट, जो मई 2023 में मीती और कुकी समुदायों के बीच जातीय टकराव से शुरू हुआ, में कई मौतें, बड़े पैमाने पर विस्थापन और कानून व्यवस्था का ढहना शामिल है। सुरक्षा अभियानों के बावजूद स्थिति अभी भी अस्थिर है, जिससे संवाद की मांग बढ़ी है।
याचिका में नागा समूह इस बात पर ज़ोर देते हैं कि स्थायी शांति केवल सभी पक्षों—जनजातीय और गैर‑जनजातीय—के बीच समावेशी वार्तालापों से ही संभव है। वे प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत हस्तक्षेप की भी मांग करते हैं ताकि बातचीत को सुगम बनाया जा सके और किसी भी समझौते में संवैधानिक प्रावधानों का सम्मान हो।
केन्द्रीय सरकार ने अभी तक विस्तृत जवाब नहीं दिया है, पर अधिकारियों ने बताया कि इस मुद्दे की उच्चतम स्तर पर समीक्षा होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह याचिका नई दिल्ली पर सुरक्षा‑केन्द्रित नीति से हटकर राजनीतिक समाधान की दिशा में कदम बढ़ाने का दबाव बढ़ा रही है।
मणिपुर संकट, जो मई 2023 में मीती और कुकी समुदायों के बीच जातीय टकराव से शुरू हुआ, में कई मौतें, बड़े पैमाने पर विस्थापन और कानून व्यवस्था का ढहना शामिल है। सुरक्षा अभियानों के बावजूद स्थिति अभी भी अस्थिर है, जिससे संवाद की मांग बढ़ी है।
याचिका में नागा समूह इस बात पर ज़ोर देते हैं कि स्थायी शांति केवल सभी पक्षों—जनजातीय और गैर‑जनजातीय—के बीच समावेशी वार्तालापों से ही संभव है। वे प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत हस्तक्षेप की भी मांग करते हैं ताकि बातचीत को सुगम बनाया जा सके और किसी भी समझौते में संवैधानिक प्रावधानों का सम्मान हो।
केन्द्रीय सरकार ने अभी तक विस्तृत जवाब नहीं दिया है, पर अधिकारियों ने बताया कि इस मुद्दे की उच्चतम स्तर पर समीक्षा होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह याचिका नई दिल्ली पर सुरक्षा‑केन्द्रित नीति से हटकर राजनीतिक समाधान की दिशा में कदम बढ़ाने का दबाव बढ़ा रही है।