📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gyanendrasinghchauha…
मनोरंजन
ग्वालियर के मोतीमहल में बनेगा 'म्यूज़ियम ऑफ़ म्यूजिक', तानसेन की स्मृतियों को सहेजने के लिए 19.18 करोड़ स्वीकृत
✍️ Amar Ujala · Gwalior
🗓 05 अक्टू. 2026, 08:15 PM
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मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड ने ग्वालियर के मोतीमहल में 'म्यूज़ियम ऑफ़ म्यूजिक' के लिये 19.18 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं, जिसका उद्देश्य तानसेन की स्मृतियों और शास्त्रीय संगीत की धरोहर को संरक्षित करना है।
ग्वालियर के ऐतिहासिक मोतीमहल परिसर में जल्द ही ‘म्यूज़ियम ऑफ़ म्यूजिक’ का निर्माण होगा, जिसके लिये मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड ने 19.18 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। यह संग्रहालय तानसेन से जुड़ी वस्तुएँ, पांडुलिपियाँ और वाद्य यंत्रों को संजोने के साथ‑साथ शास्त्रीय संगीत की धरोहर को संरक्षित करने का उद्देश्य रखता है।
राज्य की सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने और अमूर्त विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में यह कदम उठाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि संग्रहालय में इंटरैक्टिव प्रदर्शन, ऑडियो‑विज़ुअल अभिलेख और एक मंच होगा जहाँ पारम्परिक संगीतकार अपने कलाकृतियों को प्रस्तुत कर सकेंगे।
निर्माण कार्य इस वर्ष के अंत में शुरू होने की संभावना है और अगले दो‑तीन वर्षों में जनता के लिये खुलने की योजना है। विशेषज्ञों, छात्रों और पर्यटकों की बढ़ती रुचि को देखते हुए यह पहल ग्वालियर को भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रमुख केंद्र के रूप में और अधिक स्थापित करेगी।
यह परियोजना भारतीय शास्त्रीय संगीत की आज की प्रासंगिकता को उजागर करती है और सांस्कृतिक बुनियादी ढाँचे में सरकारी निवेश की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
राज्य की सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने और अमूर्त विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में यह कदम उठाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि संग्रहालय में इंटरैक्टिव प्रदर्शन, ऑडियो‑विज़ुअल अभिलेख और एक मंच होगा जहाँ पारम्परिक संगीतकार अपने कलाकृतियों को प्रस्तुत कर सकेंगे।
निर्माण कार्य इस वर्ष के अंत में शुरू होने की संभावना है और अगले दो‑तीन वर्षों में जनता के लिये खुलने की योजना है। विशेषज्ञों, छात्रों और पर्यटकों की बढ़ती रुचि को देखते हुए यह पहल ग्वालियर को भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रमुख केंद्र के रूप में और अधिक स्थापित करेगी।
यह परियोजना भारतीय शास्त्रीय संगीत की आज की प्रासंगिकता को उजागर करती है और सांस्कृतिक बुनियादी ढाँचे में सरकारी निवेश की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।