📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / A.Savin
अपराध
मुम्बई उच्च न्यायालय ने दो वर्ष के विलंब के बाद हत्या के आरोपी को जमानत दी
✍️ Lawtext
🗓 08 अक्टू. 2026, 06:46 AM
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मुम्बई उच्च न्यायालय ने दो वर्ष से अधिक के विलंब के बाद हत्या के आरोपी को जमानत दी, यह कहते हुए कि त्वरित मुकदमे का अधिकार उल्लंघित हुआ है।
मुम्बई उच्च न्यायालय ने दो वर्ष और चार महीने के विलंब के बाद हत्या के आरोपी को जमानत दी, यह कहते हुए कि त्वरित मुकदमे के अधिकार का उल्लंघन हुआ है।
आरोपी को गिरफ्तारी के बाद से हिरासत में रखा गया था, परंतु आरोपपत्र समय पर नहीं तैयार हुआ, जिससे न्यायालय ने पाया कि यह विलंब मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
न्यायाधीश ने बताया कि अनुच्छेद 21 जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार देता है, जिसमें समय पर मुकदमा चलाना भी शामिल है, और बिना आरोप के लंबे समय तक हिरासत अनुचित है।
इस निर्णय से न्यायपालिका की प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है कि हिरासत में रखे व्यक्तियों को बिना औपचारिक आरोप के अनिश्चितकाल तक नहीं रोका जाना चाहिए।
आरोपी को गिरफ्तारी के बाद से हिरासत में रखा गया था, परंतु आरोपपत्र समय पर नहीं तैयार हुआ, जिससे न्यायालय ने पाया कि यह विलंब मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
न्यायाधीश ने बताया कि अनुच्छेद 21 जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार देता है, जिसमें समय पर मुकदमा चलाना भी शामिल है, और बिना आरोप के लंबे समय तक हिरासत अनुचित है।
इस निर्णय से न्यायपालिका की प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है कि हिरासत में रखे व्यक्तियों को बिना औपचारिक आरोप के अनिश्चितकाल तक नहीं रोका जाना चाहिए।