📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gyanendra_Singh_Chau…
शिक्षा
जबलपुर हाई कोर्ट के आदेश पर MP NEET PG 2026 काउंसलिंग रोक
✍️ Shiksha.com
🗓 04 नव. 2026, 03:38 PM
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मध्य प्रदेश में 2026 NEET PG काउंसलिंग की पहली राउंड को जबलपुर हाई कोर्ट के आदेश पर रोक दिया गया है।
मध्य प्रदेश सरकार ने जबलपुर हाई कोर्ट के स्थगन आदेश के बाद 2026 बैच के NEET PG काउंसलिंग की पहली राउंड को रोक दिया है। कोर्ट ने उन याचिकाओं के बाद हस्तक्षेप किया, जिनमें प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता और सीटों के वितरण पर सवाल उठाए गए थे।
राज्य के अधिकारियों ने बताया कि सभी ऑनलाइन पोर्टल और काउंसलिंग केंद्र तब तक निष्क्रिय रहेंगे जब तक नई सूचना नहीं आती। जिन्होंने पहली राउंड के लिए पंजीकरण किया था, उन्हें आगे के कदमों के बारे में आधिकारिक सूचना का इंतजार करने को कहा गया है।
यह रोकाव हजारों मेडिकल स्नातकों के लिए अनिश्चितता पैदा कर रहा है, जो राज्य के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में पोस्टग्रेजुएट सीटें पाने की आशा कर रहे थे। शिक्षा विभाग ने कोर्ट की चिंताओं को दूर करने और अनुपालन सुनिश्चित होने पर काउंसलिंग शीघ्र पुनः शुरू करने का आश्वासन दिया है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हाई कोर्ट की भागीदारी भारत में मेडिकल प्रवेश प्रक्रियाओं की बढ़ती जांच को दर्शाती है, खासकर हाल के अन्य राज्यों में उठे विवादों के बाद।
कॉलेज प्रशासन और छात्र समूह सहित सभी हितधारक इस स्थिति को बारीकी से देख रहे हैं, और कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप एक संशोधित समयसारिणी की उम्मीद कर रहे हैं।
राज्य के अधिकारियों ने बताया कि सभी ऑनलाइन पोर्टल और काउंसलिंग केंद्र तब तक निष्क्रिय रहेंगे जब तक नई सूचना नहीं आती। जिन्होंने पहली राउंड के लिए पंजीकरण किया था, उन्हें आगे के कदमों के बारे में आधिकारिक सूचना का इंतजार करने को कहा गया है।
यह रोकाव हजारों मेडिकल स्नातकों के लिए अनिश्चितता पैदा कर रहा है, जो राज्य के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में पोस्टग्रेजुएट सीटें पाने की आशा कर रहे थे। शिक्षा विभाग ने कोर्ट की चिंताओं को दूर करने और अनुपालन सुनिश्चित होने पर काउंसलिंग शीघ्र पुनः शुरू करने का आश्वासन दिया है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हाई कोर्ट की भागीदारी भारत में मेडिकल प्रवेश प्रक्रियाओं की बढ़ती जांच को दर्शाती है, खासकर हाल के अन्य राज्यों में उठे विवादों के बाद।
कॉलेज प्रशासन और छात्र समूह सहित सभी हितधारक इस स्थिति को बारीकी से देख रहे हैं, और कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप एक संशोधित समयसारिणी की उम्मीद कर रहे हैं।