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23 सित. 2026
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एमपी हाई कोर्ट ने कहा, अदालत जांच एजेंसी को चार्जशीट दाखिल करने के लिए बाध्य नहीं कर सकती
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gyanendra_Singh_Chau…
अपराध

एमपी हाई कोर्ट ने कहा, अदालत जांच एजेंसी को चार्जशीट दाखिल करने के लिए बाध्य नहीं कर सकती

✍️ Live Law 🗓 23 सित. 2026, 03:17 AM 👁 12
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मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा कि न्यायालय केवल अपनी राय के आधार पर जांच एजेंसी को चार्जशीट दाखिल करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता, क्योंकि यह एजेंसी का विवेक है।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक आपराधिक मामले में जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत क्लोजर रिपोर्ट पर विचार करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत से पूछा गया कि क्या वह क्लोजर रिपोर्ट होने के बावजूद एजेंसी को चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दे सकती है।

पीठ ने स्पष्ट किया कि चार्जशीट दाखिल करने का अधिकार जांच एजेंसी के पास होता है और न्यायालय अपने सबूतों के बारे में अपनी राय के आधार पर इस निर्णय को ओवरराइड नहीं कर सकता। इसने जोर दिया कि न्यायपालिका का हस्तक्षेप आपराधिक प्रक्रिया संहिता के तहत एजेंसियों को दिए गए वैधानिक विवेक को कमजोर कर देगा।

इसके परिणामस्वरूप, अदालत ने एजेंसी पर चार्जशीट दाखिल करने के लिए कोई बाध्यकारी आदेश जारी नहीं किया, जिससे क्लोजर रिपोर्ट यथावत रहेगी, जब तक कि प्रभावित पक्ष कोई अन्य कानूनी उपाय नहीं अपनाता। यह फैसला जांच और न्यायिक कार्यों के बीच पृथक्करण के सिद्धांत को मजबूत करता है।

कानून के विशेषज्ञों ने बताया कि यह निर्णय उन पूर्व के precedents के अनुरूप है जहां अदालतों ने जांच एजेंसियों को चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश देने से परहेज किया है, जिससे पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों की स्वायत्तता बनी रहती है।
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