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11 जुल. 2026
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एमपी उच्च न्यायालय ने महिला को चुने हुए साथी के साथ रहने का अधिकार दिया, घर लौटने के लिए मजबूर नहीं किया
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Lakhan Singh Bhargav
राजनीति

एमपी उच्च न्यायालय ने महिला को चुने हुए साथी के साथ रहने का अधिकार दिया, घर लौटने के लिए मजबूर नहीं किया

✍️ LawBeat 🗓 10 जुल. 2026, 09:32 PM 👁 3

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि वयस्क महिला अपने चुने हुए साथी के साथ रहने के लिए स्वतंत्र है और उसे अपने माता-पिता के घर लौटने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय जारी किया, जिसमें कहा गया कि वयस्क महिला को अपने साथी के साथ रहने का अधिकार है और उसे अपने माता-पिता के घर लौटने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। इस मामले में, न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि महिला की स्वायत्तता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता संविधान के तहत संरक्षित है और उसे अपनी इच्छा के विरुद्ध किसी भी स्थान पर रहने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। यह निर्णय यह स्पष्ट करता है कि जबरन वापसी मूलभूत अधिकार का उल्लंघन करती है।

यह निर्णय वयस्क महिलाओं को पारिवारिक दबाव से बचाने और उनके व्यक्तिगत निर्णयों का सम्मान करने के महत्व को रेखांकित करता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय समान मामलों में एक मिसाल कायम करेगा।

उच्च न्यायालय का यह निर्णय पारंपरिक पारिवारिक ढाँचों के संदर्भ में व्यक्तिगत संबंधों में स्वायत्तता के महत्व को उजागर करता है।
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