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28 अग. 2026
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एमपी हाई कोर्ट ने न्यायिक बुनियादी ढाँचा को संवैधानिक कर्तव्य कहा, वित्तीय बाधाओं को नहीं माना जायेगा
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Yann Forget
देश

एमपी हाई कोर्ट ने न्यायिक बुनियादी ढाँचा को संवैधानिक कर्तव्य कहा, वित्तीय बाधाओं को नहीं माना जायेगा

✍️ Live Law 🗓 26 अग. 2026, 01:23 PM 👁 11
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा कि न्यायिक बुनियादी ढाँचा प्रदान करना संवैधानिक कर्तव्य है और वित्तीय कमी को कारण नहीं माना जाएगा।

बोपाल में स्थित मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि न्यायिक बुनियादी ढाँचा प्रदान करना संविधान में निहित कर्तव्य है। कोर्ट ने यह तर्क अस्वीकार किया कि बजट की कमी के कारण अदालतों के निर्माण में देरी को जायज ठहराया जा सकता है।

न्यायालयों की उचित सुविधा न होने से नागरिकों के त्वरित न्याय के अधिकार पर असर पड़ता है, जो अनुच्छेद 21 के तहत संवैधानिक रूप से सुरक्षित है। कोर्ट ने राज्य सरकार से अनुरोध किया कि वह बजट संबंधी बहानों को छोड़कर अदालतों के निर्माण, नवीनीकरण और तकनीकी उन्नयन के लिए आवश्यक संसाधन तुरंत आवंटित करे।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश राज्य अधिकारियों को लंबित परियोजनाओं को तेज़ी से पूरा करने के लिए प्रेरित करेगा और अन्य हाई कोर्टों को भी बजट कारणों पर सवाल उठाने का उदाहरण देगा। कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को एक निश्चित समय सीमा के भीतर कार्यान्वयन योजना प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया।

यह फैसला भारतीय न्यायालयों में बढ़ती केस बैकलॉग की चिंताओं के बीच आया है, जो दर्शाता है कि बढ़ती मुकदमेबाजी को संभालने के लिए मजबूत बुनियादी ढाँचा आवश्यक है।
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