📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Basile Morin
मौसम
ट्राइसिटी में मानसून का अंत, बारिश में 15.9% गिरावट, मशीन लर्निंग से भविष्यवाणी
✍️ Amar Ujala · Mohali
🗓 01 अक्टू. 2026, 09:15 AM
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30 सितंबर को ट्राइसिटी (चंडीगढ़‑मोहीली‑पंचकूला) में मानसून समाप्त हो गया, जहाँ कुल वर्षा मौसमी औसत से 15.9 % कम रही। अब मौसम विज्ञानी मशीन लर्निंग से भविष्य की बारिश की मात्रा और समय का अनुमान लगाएंगे।
30 सितंबर को चंडीगढ़‑मोहीली‑पंचकूला त्रिसिटी क्षेत्र में मानसून का औपचारिक अंत हो गया। स्थानीय मौसम विभागों ने उस दिन अंतिम वर्षा दर्ज की, जिससे इस क्षेत्र के लिए मौसम का सीजन समाप्त माना गया।
भारत मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष की कुल वर्षा मौसमी औसत से 15.9 % कम रही। वर्षा में इस कमी से किसान और जल‑संसाधन प्रबंधकों को चिंता है, क्योंकि पूर्ण मानसून जलभरण और जलाशयों के भरने के लिए आवश्यक है।
इन चुनौतियों को देखते हुए विभाग ने मशीन लर्निंग आधारित एल्गोरिदम को त्वरित वर्षा पूर्वानुमान के लिए लागू करने की घोषणा की। ऐतिहासिक उपग्रह चित्र और ग्राउंड डेटा पर प्रशिक्षित ये मॉडल आने वाले हफ्तों में संभावित बादलों के समय और तीव्रता का अनुमान लगाने में मदद करेंगे।
अधिकारियों ने कहा कि यह नई भविष्यवाणी प्रणाली समय पर चेतावनी जारी करने, सिंचाई शेड्यूल को अनुकूलित करने और नीचे के क्षेत्रों में बाढ़ जोखिम को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में सहायक होगी। जबकि मानसून समाप्त हो चुका है, क्षेत्र किसी भी अनपेक्षित बारिश के लिए सतर्क रहेगा, जो कृषि और शहरी जल आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है।
यह कदम भारत के मौसम विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग को बढ़ावा देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य नागरिकों और नीति निर्माताओं को अधिक सटीक और उपयोगी मौसम जानकारी प्रदान करना है।
भारत मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष की कुल वर्षा मौसमी औसत से 15.9 % कम रही। वर्षा में इस कमी से किसान और जल‑संसाधन प्रबंधकों को चिंता है, क्योंकि पूर्ण मानसून जलभरण और जलाशयों के भरने के लिए आवश्यक है।
इन चुनौतियों को देखते हुए विभाग ने मशीन लर्निंग आधारित एल्गोरिदम को त्वरित वर्षा पूर्वानुमान के लिए लागू करने की घोषणा की। ऐतिहासिक उपग्रह चित्र और ग्राउंड डेटा पर प्रशिक्षित ये मॉडल आने वाले हफ्तों में संभावित बादलों के समय और तीव्रता का अनुमान लगाने में मदद करेंगे।
अधिकारियों ने कहा कि यह नई भविष्यवाणी प्रणाली समय पर चेतावनी जारी करने, सिंचाई शेड्यूल को अनुकूलित करने और नीचे के क्षेत्रों में बाढ़ जोखिम को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में सहायक होगी। जबकि मानसून समाप्त हो चुका है, क्षेत्र किसी भी अनपेक्षित बारिश के लिए सतर्क रहेगा, जो कृषि और शहरी जल आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है।
यह कदम भारत के मौसम विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग को बढ़ावा देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य नागरिकों और नीति निर्माताओं को अधिक सटीक और उपयोगी मौसम जानकारी प्रदान करना है।