📷 चित्र स्रोत: Indian Express (via NewsData)
विदेश
मोदी ने मस्को में पुतिन से मुलाकात की, चीन के शी जिनपिंग से मिलने की तैयारी
✍️ Indian Express
🗓 12 सित. 2026, 10:41 AM
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने की तैयारी का संकेत दिया, जिससे ब्रिक्स में भारत की संवेदनशील स्थिति उजागर हुई।
नई दिल्ली के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मस्को की यात्रा कर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से द्विपक्षीय चर्चा में मिले। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा सहयोग और यूक्रेन युद्ध के मुद्दों पर अपने‑अपने विचार साझा किए, जिससे भारत‑रूस के रणनीतिक साझेदारी को पुनः सुदृढ़ किया गया।
मोदी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा की आवश्यकता पर बल दिया और मौजूदा समझौतों के तहत रूसी तेल‑गैस आयात के अवसरों को रेखांकित किया। रक्षा सहयोग और बहुपक्षीय विश्व व्यवस्था के महत्व पर भी दोनों पक्षों ने चर्चा की।
मस्को में हुई मुलाकात के बाद अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री शी जिनपिंग से मिलने के लिए इस महीने के अंत में बीजिंग की यात्रा करेंगे। यह बैठक व्यापार, प्रौद्योगिकी और ब्रिक्स सहयोग पर केंद्रित होगी, क्योंकि भारत दोनों महान शक्तियों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि भारत की कूटनीति एक "तंग रस्सी" पर चलती है, जिसमें आर्थिक लाभ उठाते हुए किसी एक समूह के साथ पक्षपात न करने की कोशिश की जा रही है। सरकार ने कहा है कि विदेश नीति राष्ट्रीय हितों के आधार पर स्वतंत्र रहेगी।
मोदी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा की आवश्यकता पर बल दिया और मौजूदा समझौतों के तहत रूसी तेल‑गैस आयात के अवसरों को रेखांकित किया। रक्षा सहयोग और बहुपक्षीय विश्व व्यवस्था के महत्व पर भी दोनों पक्षों ने चर्चा की।
मस्को में हुई मुलाकात के बाद अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री शी जिनपिंग से मिलने के लिए इस महीने के अंत में बीजिंग की यात्रा करेंगे। यह बैठक व्यापार, प्रौद्योगिकी और ब्रिक्स सहयोग पर केंद्रित होगी, क्योंकि भारत दोनों महान शक्तियों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि भारत की कूटनीति एक "तंग रस्सी" पर चलती है, जिसमें आर्थिक लाभ उठाते हुए किसी एक समूह के साथ पक्षपात न करने की कोशिश की जा रही है। सरकार ने कहा है कि विदेश नीति राष्ट्रीय हितों के आधार पर स्वतंत्र रहेगी।