📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / GeoEvan (www.polgeonow.com)
राजनीति
2027 जनगणना में मिज़ोरम में शरणार्थियों को अलग गिनती, सरकार ने कहा
✍️ The Hindu
🗓 12 अक्टू. 2026, 04:01 AM
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मिज़ोरम सरकार ने घोषणा की है कि 2027 की जनगणना में शरणार्थियों को अलग वर्ग में गिना जाएगा।
मिज़ोरम सरकार ने घोषणा की है कि 2027 की राष्ट्रीय जनगणना में राज्य में रहने वाले शरणार्थियों को एक अलग जनसांख्यिकीय वर्ग के रूप में दर्ज किया जाएगा। यह निर्णय एक आधिकारिक आदेश के माध्यम से जारी किया गया है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय संघर्षों के कारण बढ़ती शरणार्थी संख्या पर सटीक डेटा प्राप्त करना है।
अधिकारियों का कहना है कि अलग गिनती से राज्य को लक्षित कल्याण योजनाएँ तैयार करने और शरणार्थी सहायता के लिए केंद्र सरकार के एजेंसियों के साथ समन्वय करने में मदद मिलेगी। यह कदम गृह मंत्रालय की सिफ़ारिशों के अनुरूप है, जो संवेदनशील समूहों की जनसांख्यिकीय प्रोफ़ाइल को बेहतर बनाने की बात करता है।
जनगणना का कार्य 2027 की शुरुआत में शुरू होने की उम्मीद है, और यह घरों, साक्षरता और रोजगार जैसी सामान्य जानकारी के साथ शरणार्थियों के लिए एक विशेष पंक्ति जोड़ देगा। स्थानीय निकायों से सहयोग की अपील की गई है ताकि नई श्रेणी को बिना दोहराव के दर्ज किया जा सके।
यह परिवर्तन नागरिक समाज के समूहों के अनुरोधों के बाद आया है, जिन्होंने कहा था कि शरणार्थियों को सामान्य जनसंख्या में मिलाकर उनकी विशिष्ट जरूरतें छिप जाती हैं। अतिरिक्त वित्तीय खर्च की घोषणा नहीं की गई है, और राज्य को उम्मीद है कि मौजूदा जनगणना ढांचा इस नई वर्गीकरण को संभाल लेगा।
सरकार ने वर्तमान में मिज़ोरम में रहने वाले शरणार्थियों की सटीक संख्या नहीं बताई, पर अलग गिनती भविष्य की नीतियों के निर्माण में स्पष्ट अंतर्दृष्टि प्रदान करेगी।
अधिकारियों का कहना है कि अलग गिनती से राज्य को लक्षित कल्याण योजनाएँ तैयार करने और शरणार्थी सहायता के लिए केंद्र सरकार के एजेंसियों के साथ समन्वय करने में मदद मिलेगी। यह कदम गृह मंत्रालय की सिफ़ारिशों के अनुरूप है, जो संवेदनशील समूहों की जनसांख्यिकीय प्रोफ़ाइल को बेहतर बनाने की बात करता है।
जनगणना का कार्य 2027 की शुरुआत में शुरू होने की उम्मीद है, और यह घरों, साक्षरता और रोजगार जैसी सामान्य जानकारी के साथ शरणार्थियों के लिए एक विशेष पंक्ति जोड़ देगा। स्थानीय निकायों से सहयोग की अपील की गई है ताकि नई श्रेणी को बिना दोहराव के दर्ज किया जा सके।
यह परिवर्तन नागरिक समाज के समूहों के अनुरोधों के बाद आया है, जिन्होंने कहा था कि शरणार्थियों को सामान्य जनसंख्या में मिलाकर उनकी विशिष्ट जरूरतें छिप जाती हैं। अतिरिक्त वित्तीय खर्च की घोषणा नहीं की गई है, और राज्य को उम्मीद है कि मौजूदा जनगणना ढांचा इस नई वर्गीकरण को संभाल लेगा।
सरकार ने वर्तमान में मिज़ोरम में रहने वाले शरणार्थियों की सटीक संख्या नहीं बताई, पर अलग गिनती भविष्य की नीतियों के निर्माण में स्पष्ट अंतर्दृष्टि प्रदान करेगी।