📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Cooperation
राजनीति
मिज़ोरम कांग्रेस प्रमुख ने कहा, अमित शाह ने ज़ीपीएम को भाजपा में मिलाने की योजना बनाई
✍️ The Times of India
🗓 09 अक्टू. 2026, 01:47 AM
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मिज़ोरम कांग्रेस नेता ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ज़ोराम पीपल्स मूवमेंट को भाजपा में शामिल करने की सोच रहे थे।
मिज़ोरम कांग्रेस प्रमुख ने सार्वजनिक रूप से कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ज़ोराम पीपल्स मूवमेंट (ZPM) को भाजपा में शामिल करने की योजना बनाई थी। यह बात टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने रिपोर्ट की, जो आगामी चुनावी परिदृश्य में राज्य की राजनीतिक गतिशीलता को उजागर करती है। कांग्रेस नेता ने कोई विस्तृत सबूत नहीं दिया, पर यह दावा भाजपा की मिज़ोरम में प्रभाव बढ़ाने की रणनीतिक रुचि को दर्शाता है। ZPM, एक क्षेत्रीय पार्टी है, जिसका विधायी स्तर पर सीमित प्रतिनिधित्व है और वह पहले विभिन्न राष्ट्रीय एवं स्थानीय गठबंधनों के साथ जुड़ी रही है। यह बयान मिज़ोरम में राजनीतिक बहस में एक नया आयाम जोड़ता है, जहाँ पार्टियां मतदाता समर्थन के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।
यह आरोप भाजपा के उत्तर-पूर्व में अपनी पकड़ मजबूत करने के प्रयास के बीच आया है, जहाँ क्षेत्रीय पार्टियों का महत्व अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि ZPM को भाजपा में लाने का कोई भी प्रयास आगामी विधानसभा चुनावों से पहले गठबंधन पैटर्न को बदल सकता है। हालांकि, अब तक अमित शाह या भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
विश्लेषकों ने बताया कि यह दावा उन निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता की राय को प्रभावित कर सकता है जहाँ ZPM का स्थानीय समर्थन मजबूत है। मिज़ोरम का राजनीतिक परिदृश्य अभी भी बदल रहा है, जहाँ पार्टियां क्षेत्रीय आकांक्षाओं और राष्ट्रीय एजेंडा के बीच संतुलन बनाते हुए काम कर रही हैं।
यह आरोप भाजपा के उत्तर-पूर्व में अपनी पकड़ मजबूत करने के प्रयास के बीच आया है, जहाँ क्षेत्रीय पार्टियों का महत्व अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि ZPM को भाजपा में लाने का कोई भी प्रयास आगामी विधानसभा चुनावों से पहले गठबंधन पैटर्न को बदल सकता है। हालांकि, अब तक अमित शाह या भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
विश्लेषकों ने बताया कि यह दावा उन निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता की राय को प्रभावित कर सकता है जहाँ ZPM का स्थानीय समर्थन मजबूत है। मिज़ोरम का राजनीतिक परिदृश्य अभी भी बदल रहा है, जहाँ पार्टियां क्षेत्रीय आकांक्षाओं और राष्ट्रीय एजेंडा के बीच संतुलन बनाते हुए काम कर रही हैं।