📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / http://mizoram.nic.in/gov/lalduhoma.jpg
राजनीति
मिज़ोरम के मुख्यमंत्री और ईसाई समूहों ने एफसीआरए संशोधन बिल की जाँच के लिए जेडीपीसी की माँग की
✍️ indiatodayne.in
🗓 10 अग. 2026, 04:33 PM
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मिज़ोरम के मुख्यमंत्री लालदुहमा और कई ईसाई संगठनों ने विदेशी योगदान (नियमन) अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों की जाँच के लिए संयुक्त संसदीय समिति की मांग की है।
भारत के विदेशी योगदान (नियमन) अधिनियम (FCRA) संशोधन बिल ने कई हितधारकों का ध्यान आकर्षित किया है। यह बिल गैर‑सरकारी संगठनों द्वारा विदेशी धन प्राप्त करने के तरीके में बदलाव का प्रस्ताव रखता है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं।
मिज़ोरम में, मुख्यमंत्री लालदुहमा ने कई ईसाई संगठनों के साथ मिलकर प्रस्तावित संशोधनों के प्रति चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि ये बदलाव राज्य के सामाजिक‑सांस्कृतिक ताने‑बाने की रक्षा करने वाले नियामक ढांचे को कमजोर कर सकते हैं।
इस गठबंधन ने संसद से एक संयुक्त संसदीय समिति (JPC) गठित करने का आग्रह किया है, ताकि बिल की विस्तृत जाँच की जा सके। JPC दोनों सदनों के सदस्यों को एकत्रित करके विधेयक की समीक्षा करेगा और आवश्यकतानुसार संशोधन सुझाएगा।
यदि JPC गठित हो जाता है, तो यह बिल के पारित होने में देरी कर सकता है और मिज़ोरम व अन्य राज्यों में नागरिक समाज संगठनों पर इसके प्रभाव पर अधिक गहन बहस की अनुमति देगा।
मिज़ोरम में, मुख्यमंत्री लालदुहमा ने कई ईसाई संगठनों के साथ मिलकर प्रस्तावित संशोधनों के प्रति चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि ये बदलाव राज्य के सामाजिक‑सांस्कृतिक ताने‑बाने की रक्षा करने वाले नियामक ढांचे को कमजोर कर सकते हैं।
इस गठबंधन ने संसद से एक संयुक्त संसदीय समिति (JPC) गठित करने का आग्रह किया है, ताकि बिल की विस्तृत जाँच की जा सके। JPC दोनों सदनों के सदस्यों को एकत्रित करके विधेयक की समीक्षा करेगा और आवश्यकतानुसार संशोधन सुझाएगा।
यदि JPC गठित हो जाता है, तो यह बिल के पारित होने में देरी कर सकता है और मिज़ोरम व अन्य राज्यों में नागरिक समाज संगठनों पर इसके प्रभाव पर अधिक गहन बहस की अनुमति देगा।