📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Information and Broadcasting
खेल
दूध वाले के बेटे नितेश सिवाच ने एशियन गेम्स में रेसलिंग में चांदी का पदक जीता
✍️ indiatoday.in
🗓 02 अक्टू. 2026, 09:16 AM
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दूध वाले के बेटे नितेश सिवाच ने एशियन गेम्स में रेसलिंग में चांदी का पदक जीतकर अपनी अथक मेहनत को सिद्ध किया।
रेसलिंग के अनुभवी खिलाड़ी नितेश सिवाच ने एशियन गेम्स में रेसलिंग में चांदी का पदक जीतकर अपने करियर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। दूध वाले के बेटे के रूप में साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले सिवाच की कहानी दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत का उदाहरण है। इस महाद्वीपीय प्रतियोगिता में उनका प्रदर्शन भारत की जमीनी स्तर की खेल व्यवस्था से उभरते हुए प्रतिभा को उजागर करता है। यह पदक न केवल व्यक्तिगत जीत है, बल्कि समान पृष्ठभूमि से आने वाले युवा एथलीटों के लिए प्रेरणा भी है। सिवाच की सफलता से देश में रेसलिंग के प्रति रुचि और समर्थन बढ़ने की उम्मीद है।
सिवाच ने कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट में भाग लेकर इस मंच तक पहुंच बनाई। सीमित संसाधनों के बावजूद उनका संकल्प कभी नहीं टूटा, जिससे उन्हें एशिया के बड़े मंच पर मान्यता मिली। यह चांदी का पदक उनके कौशल, अनुशासन और परिवार के समर्थन का प्रमाण है, जिन्होंने उनके सफर में अहम भूमिका निभाई।
यह उपलब्धि एशियन खेलों में भारत की रेसलिंग उपस्थिति को और मजबूत करती है। जैसे ही राष्ट्र नितेश सिवाच की इस जीत का जश्न मनाता है, खेल अधिकारियों और संस्थाओं से उम्मीद की जा रही है कि वे ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में प्रतिभा की पहचान और विकास के लिए निवेश जारी रखें।
सिवाच ने कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट में भाग लेकर इस मंच तक पहुंच बनाई। सीमित संसाधनों के बावजूद उनका संकल्प कभी नहीं टूटा, जिससे उन्हें एशिया के बड़े मंच पर मान्यता मिली। यह चांदी का पदक उनके कौशल, अनुशासन और परिवार के समर्थन का प्रमाण है, जिन्होंने उनके सफर में अहम भूमिका निभाई।
यह उपलब्धि एशियन खेलों में भारत की रेसलिंग उपस्थिति को और मजबूत करती है। जैसे ही राष्ट्र नितेश सिवाच की इस जीत का जश्न मनाता है, खेल अधिकारियों और संस्थाओं से उम्मीद की जा रही है कि वे ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में प्रतिभा की पहचान और विकास के लिए निवेश जारी रखें।