📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Funkyxian
कृषि
अध्ययन: मेघालय में 3.4 लाख हेक्टेयर खेती योग्य बंजर भूमि की पहचान
✍️ Hindustan Times
🗓 19 अक्टू. 2026, 11:01 AM
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हाल ही में किए गए एक अध्ययन ने मेघालय में 3.4 लाख हेक्टेयर खेती योग्य बंजर भूमि की पहचान की है, जो राज्य में कृषि विस्तार के लिए महत्वपूर्ण संभावनाओं को दर्शाता है।
एक व्यापक अध्ययन से पता चला है कि मेघालय में लगभग 3.4 लाख हेक्टेयर खेती योग्य बंजर भूमि उपलब्ध है। यह खोज राज्य की अपरिभूत कृषि क्षमता को उजागर करती है, जिससे संकेत मिलता है कि इन क्षेत्रों को खेती के लिए उपयोग किया जा सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण जीविकोपधारा को मजबूती मिलेगी।
इतनी विशाल भूमि की पहचान राज्य की कृषि योजनाबद्धता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इन विशिष्ट क्षेत्रों को मैपिंग करके, अधिकारी बेहतर रणनीति बना सकते हैं कि बंजर या कम उपयोग की गई भूमि को उत्पादक खेती योग्य भूमि में कैसे बदला जाए।
हालांकि अध्ययन ने इस भूमि की उपलब्धता के बारे में ठोस डेटा प्रदान किया है, अगले चरण में संभवतः इन क्षेत्रों में मिट्टी की गुणवत्ता और जल उपलब्धता का मूल्यांकन किया जाएगा। यह डेटा यह निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि इन नई पहचान की गई भूमियों के लिए कौन से फसलें सबसे उपयुक्त हैं।
यह रिपोर्ट पूर्वोत्तर राज्य में कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए भविष्य की नीतिगत हस्तक्षेपों के लिए एक आधार प्रदान करती है। यह उन लक्षित पहलों की आवश्यकता पर प्रकाश डालती है जो किसानों के लिए संसाधनों और तकनीकी समर्थन को संचालित करने के लिए आवश्यक हैं, जो इन भूमियों को अपना सकते हैं।
इतनी विशाल भूमि की पहचान राज्य की कृषि योजनाबद्धता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इन विशिष्ट क्षेत्रों को मैपिंग करके, अधिकारी बेहतर रणनीति बना सकते हैं कि बंजर या कम उपयोग की गई भूमि को उत्पादक खेती योग्य भूमि में कैसे बदला जाए।
हालांकि अध्ययन ने इस भूमि की उपलब्धता के बारे में ठोस डेटा प्रदान किया है, अगले चरण में संभवतः इन क्षेत्रों में मिट्टी की गुणवत्ता और जल उपलब्धता का मूल्यांकन किया जाएगा। यह डेटा यह निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि इन नई पहचान की गई भूमियों के लिए कौन से फसलें सबसे उपयुक्त हैं।
यह रिपोर्ट पूर्वोत्तर राज्य में कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए भविष्य की नीतिगत हस्तक्षेपों के लिए एक आधार प्रदान करती है। यह उन लक्षित पहलों की आवश्यकता पर प्रकाश डालती है जो किसानों के लिए संसाधनों और तकनीकी समर्थन को संचालित करने के लिए आवश्यक हैं, जो इन भूमियों को अपना सकते हैं।