📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Aiban-03
अपराध
मेघालय हाई कोर्ट ने 2015 के बाल उत्पीड़न मामले में पीओसीएसओ सजा को बरकरार रखा, जुर्माना घटाया
✍️ India Today NE
🗓 17 सित. 2026, 12:16 PM
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मेघालय हाई कोर्ट ने पीओसीएसओ अधिनियम के तहत 2015 के बाल उत्पीड़न मामले में सजा को बरकरार रखा और जुर्माना घटा दिया।
मेघालय हाई कोर्ट ने 2015 में हुए एक बाल उत्पीड़न मामले में पीओसीएसओ अधिनियम के तहत अभियुक्त की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को पुष्टि करते हुए कहा कि आरोपी पर लगाए गए आरोप सिद्ध हुए हैं।
सजा को कायम रखने के साथ ही न्यायालय ने अभियुक्त पर लगाए गए जुर्माने को घटा दिया है। जुर्माने में कमी के कारणों को संक्षिप्त रूप में बताया गया, लेकिन विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किए गए।
कानूनी विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला बाल यौन शोषण के मामलों में कड़ी कार्रवाई के साथ-साथ दंड की अनुपातिकता को भी दर्शाता है। यह निर्णय उत्तर‑पूर्वी भारत में समान मामलों के लिए एक मार्गदर्शक बन सकता है।
अब तक किसी अपील की सूचना नहीं मिली है और संशोधित जुर्माने के भुगतान के बाद मामला समाप्त माना जाएगा।
सजा को कायम रखने के साथ ही न्यायालय ने अभियुक्त पर लगाए गए जुर्माने को घटा दिया है। जुर्माने में कमी के कारणों को संक्षिप्त रूप में बताया गया, लेकिन विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किए गए।
कानूनी विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला बाल यौन शोषण के मामलों में कड़ी कार्रवाई के साथ-साथ दंड की अनुपातिकता को भी दर्शाता है। यह निर्णय उत्तर‑पूर्वी भारत में समान मामलों के लिए एक मार्गदर्शक बन सकता है।
अब तक किसी अपील की सूचना नहीं मिली है और संशोधित जुर्माने के भुगतान के बाद मामला समाप्त माना जाएगा।