📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Home Affairs
राजनीति
मेघालय सीएम ने एफसीआरए मुद्दे में विदेशी हस्तक्षेप की अपील को ‘बहुत अनुचित’ कहा
✍️ India Today NE
🗓 07 अक्टू. 2026, 05:31 AM
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मेघालय के मुख्यमंत्री ने विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) मुद्दे में विदेशी हस्तक्षेप की अपील को अत्यंत अनुचित कहा।
मेघालय के मुख्यमंत्री ने विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) से जुड़ी चल रही बहस में विदेशी हस्तक्षेप की मांग को दृढ़ता से खारिज कर दिया। उन्होंने इस अपील को "बहुत अनुचित" कहा और कहा कि यह मामला भारत के संवैधानिक ढांचे के भीतर ही सुलझाया जाना चाहिए।
मुख्य मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य की प्रशासनिक क्षमता इस मुद्दे को बिना किसी बाहरी मदद के निपटाने में सक्षम है। उन्होंने चेतावनी दी कि विदेशी हस्तक्षेप को आमंत्रित करने से राष्ट्रीय संप्रभुता को नुकसान पहुँच सकता है और अन्य राज्यों के लिए खतरनाक मिसाल कायम हो सकती है।
हालाँकि अपील के विशिष्ट विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए, मुख्यमंत्री के इस बयान से घरेलू नियामक मामलों में बाहरी प्रभाव के खिलाफ कड़ा रुख स्पष्ट होता है, जो भारत के आंतरिक मामलों की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार की नीति के अनुरूप है।
यह टिप्पणी शिलॉंग में आयोजित एक प्रेस ब्रीफ़िंग के दौरान की गई, जहाँ मुख्यमंत्री ने एफसीआरए के अनुपालन और पारदर्शिता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई, साथ ही विदेशी हस्तक्षेप की किसी भी संभावना को खारिज किया।
विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान राज्य और नागरिक समाज के बीच विदेशी फंडिंग के नियमन को लेकर चल रहे तनाव को दर्शाता है, विशेषकर NGOs और राजनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में।
मुख्य मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य की प्रशासनिक क्षमता इस मुद्दे को बिना किसी बाहरी मदद के निपटाने में सक्षम है। उन्होंने चेतावनी दी कि विदेशी हस्तक्षेप को आमंत्रित करने से राष्ट्रीय संप्रभुता को नुकसान पहुँच सकता है और अन्य राज्यों के लिए खतरनाक मिसाल कायम हो सकती है।
हालाँकि अपील के विशिष्ट विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए, मुख्यमंत्री के इस बयान से घरेलू नियामक मामलों में बाहरी प्रभाव के खिलाफ कड़ा रुख स्पष्ट होता है, जो भारत के आंतरिक मामलों की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार की नीति के अनुरूप है।
यह टिप्पणी शिलॉंग में आयोजित एक प्रेस ब्रीफ़िंग के दौरान की गई, जहाँ मुख्यमंत्री ने एफसीआरए के अनुपालन और पारदर्शिता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई, साथ ही विदेशी हस्तक्षेप की किसी भी संभावना को खारिज किया।
विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान राज्य और नागरिक समाज के बीच विदेशी फंडिंग के नियमन को लेकर चल रहे तनाव को दर्शाता है, विशेषकर NGOs और राजनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में।