📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Govindaraj Mahalakshmi
शिक्षा
एमबीए ग्रेजुएट ने 100% प्लेसमेंट वादा न निभाने वाले संस्थान को कोर्ट में हराया, पूरी रिफंड मिली
✍️ Livemint
🗓 24 सित. 2026, 03:36 AM
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एक एमबीए ग्रेजुएट ने 100% नौकरी‑प्लेसमेंट वादा न निभाने वाले संस्थान को कोर्ट में खींचा और पूरी रिफंड मिलने का आदेश मिला।
एमबीए बैच के लिए 100% प्लेसमेंट का वादा करके निजी संस्थान में दाखिला लेने वाले ग्रेजुएट ने वादा न निभाने के बाद उपभोक्ता न्यायालय में केस दायर किया। उन्होंने संस्थान पर गलत विज्ञापन और फीस वसूलने का आरोप लगाया।
न्यायालय ने संस्थान के विज्ञापन, प्रवेश पुस्तिकाएँ और अन्य छात्रों के बयानों की जांच की। पाया गया कि संस्थान ने अपने दावे को सिद्ध करने के लिए कोई ठोस प्लेसमेंट डेटा नहीं दिया और उपभोक्ता संरक्षण नियमों का उल्लंघन किया।
निर्णय में न्यायालय ने संस्थान को छात्र द्वारा भुगतान की गई पूरी ट्यूशन फीस, साथ ही ब्याज सहित, वापस करने का आदेश दिया। यह फैसला उन शैक्षणिक संस्थानों की विज्ञापन प्रथाओं पर बढ़ती जांच को दर्शाता है जो नौकरी की गारंटी देते हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह रूलिंग अन्य छात्रों को समान वादों को चुनौती देने के लिए प्रेरित कर सकती है और संस्थानों को पारदर्शी प्लेसमेंट रिपोर्टिंग अपनाने के लिए मजबूर कर सकती है।
न्यायालय ने संस्थान के विज्ञापन, प्रवेश पुस्तिकाएँ और अन्य छात्रों के बयानों की जांच की। पाया गया कि संस्थान ने अपने दावे को सिद्ध करने के लिए कोई ठोस प्लेसमेंट डेटा नहीं दिया और उपभोक्ता संरक्षण नियमों का उल्लंघन किया।
निर्णय में न्यायालय ने संस्थान को छात्र द्वारा भुगतान की गई पूरी ट्यूशन फीस, साथ ही ब्याज सहित, वापस करने का आदेश दिया। यह फैसला उन शैक्षणिक संस्थानों की विज्ञापन प्रथाओं पर बढ़ती जांच को दर्शाता है जो नौकरी की गारंटी देते हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह रूलिंग अन्य छात्रों को समान वादों को चुनौती देने के लिए प्रेरित कर सकती है और संस्थानों को पारदर्शी प्लेसमेंट रिपोर्टिंग अपनाने के लिए मजबूर कर सकती है।