मंदिरो ं मे ं भगवान श्रीकृष्ण ने धारण किए सफेद वस्त्र, शरद पूर्णिमा पर चांदनी रात मे ं खीर का लगाया भोग, रातभर भजन-कीर्तन हुए
शरद ऋतु की निर्मल चांदनी, आसमान मे ं चमकता पूर्णिमा का
चंद्रमा और चांदनी रात में रखी खीर की मिठास । शरद पूर्णिमा
का पर्व शहर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मंदिरो ं मे ं भगवान का विशेष शृंगार किया गया। भगवान को सफेद वस्त्र धारण कराए गए और चांदनी रात में खीर बनाकर भोग लगाया गया। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर परिवार मे ं सुख-समृद्धि, खुशहाली और शांति की कामना की। श्री विजयेश्वर धर्मार्थ ट्रस्ट शिव मंदिर मे ं भी शरद पूर्णिमा पर विशेष धार्मिक आयोजन हुआ। यहा ं भगवान को सफेद वस्त्र धारण कराकर खीर का भोग लगाया गया। चंद्रमा की शीतल चांदनी और मंदिरो ं मे ं सज े विशेष शृंगार ने वातावरण
को भक्तिमय बना दिया।
ज्योतिषाचार्य पंडित ताराचंद शास्त्री के अनुसार हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। उसकी किरणें अमृत के समान गुणकारी मानी जाती हैं। इसी विश्वास के चलते लोग दूध और चावल से बनी खीर को रात मे ं खुले आसमान के नीच े चांदनी
चंद्रमा और चांदनी रात में रखी खीर की मिठास । शरद पूर्णिमा
का पर्व शहर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मंदिरो ं मे ं भगवान का विशेष शृंगार किया गया। भगवान को सफेद वस्त्र धारण कराए गए और चांदनी रात में खीर बनाकर भोग लगाया गया। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर परिवार मे ं सुख-समृद्धि, खुशहाली और शांति की कामना की। श्री विजयेश्वर धर्मार्थ ट्रस्ट शिव मंदिर मे ं भी शरद पूर्णिमा पर विशेष धार्मिक आयोजन हुआ। यहा ं भगवान को सफेद वस्त्र धारण कराकर खीर का भोग लगाया गया। चंद्रमा की शीतल चांदनी और मंदिरो ं मे ं सज े विशेष शृंगार ने वातावरण
को भक्तिमय बना दिया।
ज्योतिषाचार्य पंडित ताराचंद शास्त्री के अनुसार हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। उसकी किरणें अमृत के समान गुणकारी मानी जाती हैं। इसी विश्वास के चलते लोग दूध और चावल से बनी खीर को रात मे ं खुले आसमान के नीच े चांदनी