📷 चित्र स्रोत: The Hindu (via NewsData)
मनोरंजन
मराठी लघु-उपन्यास ‘माझी अखेरची आत्मचरित्र’ और ‘टोपी वाली स्त्री’ की समीक्षा
✍️ The Hindu
🗓 19 जून 2026, 08:32 AM
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राजेंद्र बानहट्टी के ‘माझी अखेरची आत्मचरित्र’ और कमल देसाई के ‘टोपी वाली स्त्री’ के क्रमशः जेरी पिंटो और शांता गोखले द्वारा किए गए अनुवादों ने लेखकों के कार्यों को जीवंत कर दिया है।
मराठी लेखकों राजेंद्र बानहट्टी और कमल देसाई की साहित्यिक कृतियों को हाल के अनुवादों के माध्यम से उजागर किया जा रहा है। बानहट्टी के लघु-उपन्यास, ‘माझी अखेरची आत्मचरित्र’, का प्रसिद्ध अनुवादक जेरी पिंटो द्वारा अंग्रेजी में अनुवाद किया गया है।
इसी तरह, कमल देसाई की रचना, ‘टोपी वाली स्त्री’, का भी अंग्रेजी में अनुवाद किया गया है। इस अनुवाद का श्रेय शांता गोखले को जाता है, जो साहित्यिक अनुवाद के क्षेत्र में एक जानी-मानी हस्ती हैं। इन अनुवादों का उद्देश्य मूल मराठी लघु-उपन्यासों के सूक्ष्म आख्यानों और विषयगत अन्वेषणों को व्यापक दर्शकों के लिए सुलभ बनाना है।
समीक्षाओं से पता चलता है कि अनुवादित संस्करण मूल लेखन के सार और जीवंतता को सफलतापूर्वक पकड़ते हैं, जिससे बानहट्टी और देसाई की विशिष्ट आवाज़ें पाठकों के साथ प्रतिध्वनित होती हैं।
इसी तरह, कमल देसाई की रचना, ‘टोपी वाली स्त्री’, का भी अंग्रेजी में अनुवाद किया गया है। इस अनुवाद का श्रेय शांता गोखले को जाता है, जो साहित्यिक अनुवाद के क्षेत्र में एक जानी-मानी हस्ती हैं। इन अनुवादों का उद्देश्य मूल मराठी लघु-उपन्यासों के सूक्ष्म आख्यानों और विषयगत अन्वेषणों को व्यापक दर्शकों के लिए सुलभ बनाना है।
समीक्षाओं से पता चलता है कि अनुवादित संस्करण मूल लेखन के सार और जीवंतता को सफलतापूर्वक पकड़ते हैं, जिससे बानहट्टी और देसाई की विशिष्ट आवाज़ें पाठकों के साथ प्रतिध्वनित होती हैं।