📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Original: Samudra Bikash Hazarika
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राजनीति
मनिपुर की JDF ने 2 सितंबर विधानसभा सत्र से पहले जनगणना विरोध में 24‑घंटे का हड़ताल घोषित किया
✍️ The Assam Tribune
🗓 31 अग. 2026, 01:02 PM
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मनिपुर की जनजातीय फ्रंट (JDF) ने निर्धारित जनगणना के विरोध में 24‑घंटे की राज्यव्यापी हड़ताल का आह्वान किया, जब विधानसभा 2 सितंबर को फिर से शुरू होगी।
मनिपुर की जनजातीय फ्रंट (JDF) ने राज्य भर में 24‑घंटे की हड़ताल का आह्वान किया, जिसमें नागरिकों को इस दिन सामान्य कार्यों को रोकने का निर्देश दिया गया। यह घोषणा निर्धारित जनगणना के संदर्भ में की गई है और विधानसभा के 2 सितंबर को पुनः शुरू होने से कुछ ही दिन पहले आई है।
JDF के नेता कहते हैं कि जनगणना के परिणाम राज्य की जनसांख्यिकीय संरचना और जनजातीय समुदायों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को गहरा असर डाल सकते हैं। वे तर्क देते हैं कि यदि जनगणना सही ढंग से नहीं की गई तो संसाधन आवंटन और संवैधानिक सुरक्षा दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
हड़ताल का समय इस बात को दर्शाता है कि विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले केंद्र सरकार को इन चिंताओं को गंभीरता से लेने के लिए दबाव बनाना चाहता है। वर्तमान में जनगणना प्राधिकरण या राज्य प्रशासन की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
हड़ताल के पालन पर सार्वजनिक परिवहन, बाजार और सरकारी कार्यालयों में व्यवधान की संभावना है, जिससे इम्फाल और अन्य जिलों में दैनिक जीवन प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्व में भी जनगणना‑संबंधी असंतोष को उजागर करने के लिए समान प्रकार के प्रदर्शन किए गए हैं।
JDF के नेता कहते हैं कि जनगणना के परिणाम राज्य की जनसांख्यिकीय संरचना और जनजातीय समुदायों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को गहरा असर डाल सकते हैं। वे तर्क देते हैं कि यदि जनगणना सही ढंग से नहीं की गई तो संसाधन आवंटन और संवैधानिक सुरक्षा दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
हड़ताल का समय इस बात को दर्शाता है कि विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले केंद्र सरकार को इन चिंताओं को गंभीरता से लेने के लिए दबाव बनाना चाहता है। वर्तमान में जनगणना प्राधिकरण या राज्य प्रशासन की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
हड़ताल के पालन पर सार्वजनिक परिवहन, बाजार और सरकारी कार्यालयों में व्यवधान की संभावना है, जिससे इम्फाल और अन्य जिलों में दैनिक जीवन प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्व में भी जनगणना‑संबंधी असंतोष को उजागर करने के लिए समान प्रकार के प्रदर्शन किए गए हैं।