📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ginevrajocosa88
शिक्षा
मणिपुर के सीएम ने आर्काइव्स वीक प्रदर्शनी का उद्घाटन, पुया पांडुलिपियों को महत्व दिया
✍️ The Sangai Express
🗓 16 सित. 2026, 05:16 AM
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मणिपुर के मुख्यमंत्री ने इम्फाल में आयोजित आर्काइव्स वीक एवं रिकॉर्ड्स प्रदर्शनी का उद्घाटन किया, पुया पांडुलिपियों के महत्व को रेखांकित किया।
इम्फाल – मणिपुर के मुख्यमंत्री ने गुरुवार को राज्य की आर्काइव्स वीक एवं रिकॉर्ड्स प्रदर्शनी का आधिकारिक उद्घाटन किया, जो मणिपुर राज्य अभिलेखागार में आयोजित एक सप्ताह भर के प्रदर्शन का आरम्भ दर्शाता है। इस समारोह में वरिष्ठ अधिकारी, इतिहासकार और सांस्कृतिक संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
प्रदर्शनी में दुर्लभ पुया पांडुलिपियों का चयनित संग्रह प्रदर्शित किया गया, जो प्राचीन मीती कथा, इतिहास और विधि को दर्ज करती हैं। क्यूरेटरों ने कई पांडुलिपियों की नाजुक स्थिति को उजागर किया और उनके विद्वानों के लिए महत्त्व को रेखांकित किया।
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में अभिलेखों के डिजिटलीकरण और संरक्षण कार्य को तेज करने की अपील की, यह कहा कि इन दस्तावेज़ों का संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के लिए अनिवार्य है। उन्होंने अभिलेखागार के लिए अतिरिक्त निधि आवंटित करने और पुया ग्रंथों पर अनुसंधान को बढ़ावा देने हेतु शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग का वादा किया।
प्रदर्शनी के अंत में अभिलेखीय कर्मियों को आधुनिक संरक्षण तकनीकों में प्रशिक्षित करने के लिए विभिन्न संगोष्ठी और कार्यशालाएँ आयोजित की जाएँगी, जिससे राज्य की दस्तावेज़ीय विरासत की सुरक्षा को सुदृढ़ किया जा सके।
प्रदर्शनी में दुर्लभ पुया पांडुलिपियों का चयनित संग्रह प्रदर्शित किया गया, जो प्राचीन मीती कथा, इतिहास और विधि को दर्ज करती हैं। क्यूरेटरों ने कई पांडुलिपियों की नाजुक स्थिति को उजागर किया और उनके विद्वानों के लिए महत्त्व को रेखांकित किया।
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में अभिलेखों के डिजिटलीकरण और संरक्षण कार्य को तेज करने की अपील की, यह कहा कि इन दस्तावेज़ों का संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के लिए अनिवार्य है। उन्होंने अभिलेखागार के लिए अतिरिक्त निधि आवंटित करने और पुया ग्रंथों पर अनुसंधान को बढ़ावा देने हेतु शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग का वादा किया।
प्रदर्शनी के अंत में अभिलेखीय कर्मियों को आधुनिक संरक्षण तकनीकों में प्रशिक्षित करने के लिए विभिन्न संगोष्ठी और कार्यशालाएँ आयोजित की जाएँगी, जिससे राज्य की दस्तावेज़ीय विरासत की सुरक्षा को सुदृढ़ किया जा सके।