📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ramchandra9
राजनीति
मणिपुर विधानसभा 2 सितंबर से तीन‑दिन के सत्र में, कांग्रेस ने सीमित अवधि पर जताई आपत्ति
✍️ India Today NE
🗓 27 अग. 2026, 03:37 AM
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मणिपुर विधानसभा 2 सितंबर से तीन‑दिन के सत्र में बुलाई गई है, पर कांग्रेस ने इस सीमित अवधि पर आपत्ति जताई है।
मणिपुर विधानसभा ने 2 सितंबर से शुरू होने वाले तीन‑दिन के सत्र की घोषणा की है। राज्य के मुख्य मंत्री के कार्यालय ने बताया कि यह सत्र 2 से 4 सितंबर तक चलेगा, जिसमें कई विधायी मुद्दों पर चर्चा होगी।
सत्र की अवधि को केवल तीन दिन तक सीमित करने पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि इस संक्षिप्त समय‑सीमा से राज्य के कानून‑और‑व्यवस्था, विकास परियोजनाओं और कल्याण योजनाओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर पर्याप्त बहस नहीं हो पाएगी।
कांग्रेस ने इस मुद्दे को विधानसभा में औपचारिक रूप से उठाने और सत्र को बढ़ाने या अतिरिक्त सत्र बुलाने की मांग की है। यह स्थिति मणिपुर में चल रहे राजनीतिक तनाव को दर्शाती है, जहाँ विपक्षी दल अक्सर सरकार की प्रक्रियात्मक निर्णयों को चुनौती देते रहे हैं।
राज्य के अधिकारियों का कहना है कि निर्धारित एजेंडा को पूरा करने के लिए तीन‑दिन पर्याप्त हैं, जिसमें कुछ विधेयकों का पारित करना और बजट संबंधी आवंटनों पर चर्चा शामिल है। यदि कोई अतिरिक्त प्रस्ताव नहीं आया तो सत्र 4 सितंबर को समाप्त होगा।
विश्लेषकों का मानना है कि इस सत्र की कार्यवाही भविष्य में मणिपुर की विधायी कार्यसूची के स्वरूप को निर्धारित कर सकती है।
सत्र की अवधि को केवल तीन दिन तक सीमित करने पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि इस संक्षिप्त समय‑सीमा से राज्य के कानून‑और‑व्यवस्था, विकास परियोजनाओं और कल्याण योजनाओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर पर्याप्त बहस नहीं हो पाएगी।
कांग्रेस ने इस मुद्दे को विधानसभा में औपचारिक रूप से उठाने और सत्र को बढ़ाने या अतिरिक्त सत्र बुलाने की मांग की है। यह स्थिति मणिपुर में चल रहे राजनीतिक तनाव को दर्शाती है, जहाँ विपक्षी दल अक्सर सरकार की प्रक्रियात्मक निर्णयों को चुनौती देते रहे हैं।
राज्य के अधिकारियों का कहना है कि निर्धारित एजेंडा को पूरा करने के लिए तीन‑दिन पर्याप्त हैं, जिसमें कुछ विधेयकों का पारित करना और बजट संबंधी आवंटनों पर चर्चा शामिल है। यदि कोई अतिरिक्त प्रस्ताव नहीं आया तो सत्र 4 सितंबर को समाप्त होगा।
विश्लेषकों का मानना है कि इस सत्र की कार्यवाही भविष्य में मणिपुर की विधायी कार्यसूची के स्वरूप को निर्धारित कर सकती है।