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23 सित. 2026
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मनरेगा व राजवित्त में अनियमितता के आरोप, चिलौली ग्राम पंचायत में जांच की मांग

✍️ रिपोर्टर: ashif 🗓 23 सित. 2026, 03:52 AM 👁 8
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तिलोईअमेठी।* सिंहपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत चिलौली में वित्तीय वर्ष 2021 से 2026 के बीच मनरेगा, राज्य वित्त एवं अन्य विकास कार्यों में कथित अनियमितता और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं। मामले में शिकायतकर्ता ने ग्राम प्रधान शंकर देव साहू पुत्र स्वर्गीय मेरी लाल साहू के विरुद्ध उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तथा सरकारी धन की वसूली की मांग की है।शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ग्राम पंचायत में पिछले करीब पांच वर्षों के दौरान विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि कुछ कार्यों में धरातल पर हुए कार्य और भुगतान की गई धनराशि में अंतर होने की आशंका है। मनरेगा के तहत बिना कार्य कराए मजदूरी का भुगतान किए जाने का आरोप भी शिकायत में लगाया गया है।
शिकायत में ग्राम प्रधान के साथ ग्राम पंचायत से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने कुछ लोगों के माध्यम से मनरेगा मजदूरी की धनराशि की कथित वसूली किए जाने का भी आरोप लगाया है। इस संबंध में कुछ व्यक्तियों के नाम भी शिकायत में दर्ज किए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।शिकायतकर्ता ने मांग की है कि वर्ष 2021 से 2026 तक ग्राम पंचायत चिलौली में मनरेगा, राज्य वित्त, केंद्रीय वित्त एवं अन्य मदों से कराए गए सभी कार्यों की अभिलेखीय जांच के साथ मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाए। मस्टर रोल, मजदूरों के बैंक खातों में हुए भुगतान, सामग्री खरीद, कार्य की स्वीकृत लागत और वास्तविक कार्य की स्थिति का मिलान कराने की भी मांग की गई है।शिकायतकर्ता के अनुसार मामले को लेकर जिलाधिकारी अमेठी समेत कई अधिकारियों को लिखित शिकायत दी जा चुकी है। अब शिकायतकर्ता ने मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि जांच में सरकारी धन के दुरुपयोग अथवा वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों से धन की वसूली कर सरकारी खजाने में जमा कराया जाए तथा नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए।हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले में ग्राम प्रधान और संबंधित विभागीय अधिकारियों का पक्ष तथा प्रशासनिक जांच के परिणाम सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
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