📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sorcier Apokalyps
मनोरंजन
मलयालम OTT नई रिलीज़: धूमकेतु से द पैराडाइज़ (19‑25 अक्टूबर)
✍️ The Economic Times
🗓 24 अक्टू. 2026, 03:32 AM
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इकॉनॉमिक टाइम्स ने 19‑25 अक्टूबर के बीच OTT पर रिलीज़ होने वाली मलयालम फिल्मों की सूची दी, जिसमें धूमकेतु, द पैराडाइज़ आदि शामिल हैं।
इकॉनॉमिक टाइम्स ने 19 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक के सप्ताह में OTT प्लेटफ़ॉर्म पर आने वाली मलयालम फ़िल्मों की सूची जारी की। इस सूची में विभिन्न शैलियों की फ़िल्में शामिल हैं, जो भारत में क्षेत्रीय स्ट्रीमिंग की बढ़ती मांग को दर्शाती हैं।
सूची में प्रमुख रूप से "धूमकेतु" को पहला शीर्षक दिया गया है, जो रोमांस और सामाजिक टिप्पणी को मिलाकर एक समकालीन कहानी पेश करता है। इसके बाद "द पैराडाइज़" आता है, जो समुद्री पृष्ठभूमि में सेट एक दृश्यात्मक रूप से समृद्ध कथा है, जिसका लक्ष्य घरेलू दर्शकों के साथ-साथ प्रवासी समुदाय भी है।
इन फ़िल्मों को अमेज़न प्राइम वीडियो, नेटफ़्लिक्स और डिज़्नी+ हॉटस्टार जैसे प्रमुख प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे सब्सक्राइबर्स के लिए मलयालम सामग्री का चयन विस्तृत हो रहा है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि नई रिलीज़ की निरंतर धारा क्षेत्रीय सेक्टर को हिन्दी‑भाषी सामग्री के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी बना रही है।
यह साप्ताहिक चयन OTT कंपनियों द्वारा मलयालम प्रोडक्शन में बढ़ते निवेश को रेखांकित करता है, जो महामारी के बाद तेज़ी से बढ़ा है और विविध कहानी‑कथन प्रारूपों की खोज के साथ आगे भी जारी रहने की संभावना है।
सूची में प्रमुख रूप से "धूमकेतु" को पहला शीर्षक दिया गया है, जो रोमांस और सामाजिक टिप्पणी को मिलाकर एक समकालीन कहानी पेश करता है। इसके बाद "द पैराडाइज़" आता है, जो समुद्री पृष्ठभूमि में सेट एक दृश्यात्मक रूप से समृद्ध कथा है, जिसका लक्ष्य घरेलू दर्शकों के साथ-साथ प्रवासी समुदाय भी है।
इन फ़िल्मों को अमेज़न प्राइम वीडियो, नेटफ़्लिक्स और डिज़्नी+ हॉटस्टार जैसे प्रमुख प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे सब्सक्राइबर्स के लिए मलयालम सामग्री का चयन विस्तृत हो रहा है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि नई रिलीज़ की निरंतर धारा क्षेत्रीय सेक्टर को हिन्दी‑भाषी सामग्री के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी बना रही है।
यह साप्ताहिक चयन OTT कंपनियों द्वारा मलयालम प्रोडक्शन में बढ़ते निवेश को रेखांकित करता है, जो महामारी के बाद तेज़ी से बढ़ा है और विविध कहानी‑कथन प्रारूपों की खोज के साथ आगे भी जारी रहने की संभावना है।