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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद ने विधि विभाग की 14 योजनाओं के लिए 1342 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति दी

✍️ रिपोर्टर: Pranav Gaur 🗓 01 अक्टू. 2026, 04:26 PM 👁 12
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में विधि एवं विधायी कार्य विभाग की 14 प्रमुख योजनाओं को 16वें वित्त आयोग की अवधि के लिए 1,342 करोड़ 48 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। यह राशि न्यायिक अधोसंरचना और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने पर व्यय की जाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में संपन्न मंत्रि-परिषद की बैठक में विधि एवं विधायी कार्य विभाग की 14 प्रमुख योजनाओं को आगामी 16वें वित्त आयोग की अवधि, जो 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक प्रभावी रहेगी, के लिए निरंतरता हेतु 1,342 करोड़ 48 लाख रुपये की महत्वपूर्ण स्वीकृति प्रदान की गई है। इस धनराशि का उपयोग प्रदेश की न्यायिक अधोसंरचनाओं को मजबूत करने और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए किया जाएगा।

इस स्वीकृति के अंतर्गत, विभिन्न महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए धनराशि आवंटित की गई है। इनमें उच्च न्यायालय भवन व आवासीय परिसर के निर्माण के लिए 372 करोड़ रुपये, महाधिवक्ता कार्यालय के सुदृढ़ीकरण हेतु 357 करोड़ 77 लाख रुपये और राज्य न्यायिक अकादमी भवन के निर्माण के लिए 200 करोड़ रुपये शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, अधिवक्ता कल्याण, ए.डी.आर. सेंटर्स, लोक अदालत की गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा विभागीय आईटी एवं पुस्तकालयों को आधुनिक बनाने के लिए भी वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है।

मंत्रि-परिषद ने विशेष रूप से न्यायालयों के निर्वाह पत्र तामिल से संबंधित योजना की निरंतरता के लिए 622 करोड़ 37 लाख रुपये की स्वीकृति को मंजूरी दी है। यह योजना 16वें वित्त आयोग की अवधि के लिए ही मान्य होगी। इस योजना के माध्यम से राज्य के सभी अधीनस्थ न्यायालयों, जैसे जिला एवं सत्र न्यायालय, सिविल न्यायालय आदि में पदस्थ 'प्रोसेस सर्वर' के रूप में कार्यरत शासकीय सेवकों के वेतन, भत्तों और यात्रा देयकों का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा, जो न्यायालयों के पत्रों की तामिल का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।
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