📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Information and Broadcasting
स्वास्थ्य
महाराष्ट्र का नया उपकरण बच्चों की कुपोषण गणना में क्रांति लाएगा
✍️ The Week
🗓 22 अक्टू. 2026, 02:17 PM
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महाराष्ट्र में विकसित नया उपकरण भारत में बच्चों के कुपोषण का आकलन करने की पद्धति को सटीक बनाकर नीति निर्माण में मदद करेगा।
महाराष्ट्र के शोधकर्ताओं और स्वास्थ्य अधिकारियों की एक टीम ने एक नया विश्लेषणात्मक उपकरण प्रस्तुत किया है, जिसका उद्देश्य देशभर में बच्चों के कुपोषण की माप को बेहतर बनाना है। यह प्रणाली डिजिटल डेटा संग्रह को उन्नत विश्लेषण के साथ जोड़ती है, जिससे जिला स्तर पर वास्तविक‑समय में प्रसार दरें प्राप्त की जा सकती हैं।
वर्तमान में भारत में बच्चों के कुपोषण का अनुमान मुख्यतः समय-समय पर किए जाने वाले घरों के सर्वेक्षणों पर आधारित है, जो तेज़ बदलावों और क्षेत्रीय विविधताओं को अक्सर नजरअंदाज़ कर देते हैं। इस कमी के कारण पोषण कार्यक्रमों का सही लक्ष्यीकरण कठिन हो जाता है।
महाराष्ट्र का यह उपकरण स्कूल स्वास्थ्य रिकॉर्ड, सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की जानकारी और बायोमेट्रिक संकेतकों को एकीकृत प्लेटफ़ॉर्म में सम्मिलित करता है। इसका एल्गोरिद्म आयु, लिंग और स्थानीय सामाजिक‑आर्थिक कारकों को ध्यान में रखकर कुपोषण की अधिक सटीक तस्वीर पेश करता है।
राज्य स्वास्थ्य विभाग इस प्रणाली को चुनिंदा जिलों में परीक्षण के बाद राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) ढांचे में अपनाने की सिफारिश करेगा। यदि इसे व्यापक रूप से लागू किया गया, तो केंद्र सरकार को संसाधनों का अधिक सटीक वितरण और हस्तक्षेपों के प्रभाव की निगरानी में मदद मिल सकती है।
परियोजना में शामिल अधिकारियों ने कहा कि यह पहल 2030 तक बाल कुपोषण समाप्त करने के सरकारी लक्ष्य के अनुरूप है, और आशा है कि बेहतर डेटा से अधिक लक्षित नीतियों का निर्माण होगा।
वर्तमान में भारत में बच्चों के कुपोषण का अनुमान मुख्यतः समय-समय पर किए जाने वाले घरों के सर्वेक्षणों पर आधारित है, जो तेज़ बदलावों और क्षेत्रीय विविधताओं को अक्सर नजरअंदाज़ कर देते हैं। इस कमी के कारण पोषण कार्यक्रमों का सही लक्ष्यीकरण कठिन हो जाता है।
महाराष्ट्र का यह उपकरण स्कूल स्वास्थ्य रिकॉर्ड, सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की जानकारी और बायोमेट्रिक संकेतकों को एकीकृत प्लेटफ़ॉर्म में सम्मिलित करता है। इसका एल्गोरिद्म आयु, लिंग और स्थानीय सामाजिक‑आर्थिक कारकों को ध्यान में रखकर कुपोषण की अधिक सटीक तस्वीर पेश करता है।
राज्य स्वास्थ्य विभाग इस प्रणाली को चुनिंदा जिलों में परीक्षण के बाद राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) ढांचे में अपनाने की सिफारिश करेगा। यदि इसे व्यापक रूप से लागू किया गया, तो केंद्र सरकार को संसाधनों का अधिक सटीक वितरण और हस्तक्षेपों के प्रभाव की निगरानी में मदद मिल सकती है।
परियोजना में शामिल अधिकारियों ने कहा कि यह पहल 2030 तक बाल कुपोषण समाप्त करने के सरकारी लक्ष्य के अनुरूप है, और आशा है कि बेहतर डेटा से अधिक लक्षित नीतियों का निर्माण होगा।