📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Jorge Royan
धर्म
महाराष्ट्र के धर्मांतरण कानून ने चर्चों से अब सहमति पत्र लेना अनिवार्य किया
✍️ Amar Ujala · Maharashtra
🗓 25 अग. 2026, 01:32 PM
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महाराष्ट्र के नए धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत, अब चर्चों को प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति से लिखित सहमति पत्र लेना पड़ेगा, जिसका उद्देश्य जबरन धर्म परिवर्तन को रोकना है।
महाराष्ट्र सरकार ने एक कड़ा धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया है, जिसके तहत सभी पूजा स्थल, जिसमें ईसाई चर्च भी शामिल हैं, को प्रत्येक आगंतुक से लिखित सहमति पत्र लेना अनिवार्य किया गया है। यह प्रावधान इस सप्ताह से लागू हुआ है और इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोग स्वेच्छा से ही सम्मिलित हों और किसी दबाव या जबरन परिवर्तन का सामना न करना पड़े।
राज्य भर में चर्चों के प्रतिनिधियों ने इस नई आवश्यकता को धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के रूप में देखा है। महाराष्ट्र ईसाई संघ के प्रवक्ता ने कहा कि सहमति पत्रों की प्रक्रिया प्रशासनिक बोझ बढ़ाएगी और विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता की कमी के कारण भक्तों में भय उत्पन्न कर सकती है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह कानून अन्य राज्यों में मौजूद समान प्रावधानों के अनुरूप है, परन्तु इसका कार्यान्वयन नागरिक अधिकार संगठनों की करीबी निगरानी में रहेगा। राज्य पुलिस और स्थानीय नगरपालिका को अनुपालन की जांच करने का आदेश दिया गया है, और नियमों का उल्लंघन करने वाले चर्चों पर जुर्माना या अस्थायी बंदी जैसी सज़ा लग सकती है।
यह कदम राष्ट्रीय स्तर पर धर्मांतरण पर चल रहे बहस के बीच आया है, जहाँ केंद्र सरकार ने राज्यों को "जबर्दस्ती" धर्मांतरण को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की सलाह दी है, साथ ही व्यक्तिगत चयन की रक्षा भी करने को कहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि महाराष्ट्र का यह कानून अन्य राज्यों को भी समान नियम अपनाने के लिए प्रेरित कर सकता है।
राज्य भर में चर्चों के प्रतिनिधियों ने इस नई आवश्यकता को धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के रूप में देखा है। महाराष्ट्र ईसाई संघ के प्रवक्ता ने कहा कि सहमति पत्रों की प्रक्रिया प्रशासनिक बोझ बढ़ाएगी और विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता की कमी के कारण भक्तों में भय उत्पन्न कर सकती है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह कानून अन्य राज्यों में मौजूद समान प्रावधानों के अनुरूप है, परन्तु इसका कार्यान्वयन नागरिक अधिकार संगठनों की करीबी निगरानी में रहेगा। राज्य पुलिस और स्थानीय नगरपालिका को अनुपालन की जांच करने का आदेश दिया गया है, और नियमों का उल्लंघन करने वाले चर्चों पर जुर्माना या अस्थायी बंदी जैसी सज़ा लग सकती है।
यह कदम राष्ट्रीय स्तर पर धर्मांतरण पर चल रहे बहस के बीच आया है, जहाँ केंद्र सरकार ने राज्यों को "जबर्दस्ती" धर्मांतरण को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की सलाह दी है, साथ ही व्यक्तिगत चयन की रक्षा भी करने को कहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि महाराष्ट्र का यह कानून अन्य राज्यों को भी समान नियम अपनाने के लिए प्रेरित कर सकता है।