📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Artemy Voikhansky
विज्ञान
महाराष्ट्र के बाघ अभयारण्यों में पाले गए गिद्धों को मिली जंगली जीवन की आशा
✍️ Mid-Day
🗓 06 सित. 2026, 02:35 PM
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महाराष्ट्र के बाघ अभयारण्यों में पाले गए गिद्धों को रिहा कर जंगली जीवन में टिकने का अवसर दिया जा रहा है।
महाराष्ट्र के वन्यजीव अधिकारियों ने पाले गए गिद्धों को राज्य के बाघ अभयारण्यों में छोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस कदम का उद्देश्य इन पक्षियों को सुरक्षित आवास प्रदान करना है, जहाँ वे प्राकृतिक रूप से भोजन खोजने की क्षमता विकसित कर पारिस्थितिकी तंत्र में अपना योगदान दे सकें।
बाघ अभयारण्यों में घना वन और न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप है, जिससे गिद्धों के लिए यह उपयुक्त स्थान बनता है। वन्यजीव प्रबंधक बताते हैं कि यह पहल उन गिद्धों की जनसंख्या को पुनर्स्थापित करने के व्यापक प्रयासों के साथ मेल खाती है, जिनकी संख्या हाल के वर्षों में गंभीर रूप से घट गई है।
संरक्षित क्षेत्रों की सुरक्षा से विषाक्त पदार्थों और आवास हानि जैसे खतरे कम होने की उम्मीद है, जिससे पाले गए गिद्धों को जंगली जीवन में टिकने का वास्तविक अवसर मिलेगा।
इस कार्यक्रम की सफलता को मापने के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच और ट्रैकिंग की व्यवस्था की गई है, जिससे पक्षियों की जीवित रहने की दर और अभयारण्यों में उनकी गतिशीलता का मूल्यांकन किया जा सके।
यदि यह पहल सफल रहती है, तो इसे भारत के अन्य संरक्षित क्षेत्रों में दोहराया जा सकता है, जिससे राष्ट्रीय गिद्ध संरक्षण रणनीति को मजबूती मिलेगी।
बाघ अभयारण्यों में घना वन और न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप है, जिससे गिद्धों के लिए यह उपयुक्त स्थान बनता है। वन्यजीव प्रबंधक बताते हैं कि यह पहल उन गिद्धों की जनसंख्या को पुनर्स्थापित करने के व्यापक प्रयासों के साथ मेल खाती है, जिनकी संख्या हाल के वर्षों में गंभीर रूप से घट गई है।
संरक्षित क्षेत्रों की सुरक्षा से विषाक्त पदार्थों और आवास हानि जैसे खतरे कम होने की उम्मीद है, जिससे पाले गए गिद्धों को जंगली जीवन में टिकने का वास्तविक अवसर मिलेगा।
इस कार्यक्रम की सफलता को मापने के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच और ट्रैकिंग की व्यवस्था की गई है, जिससे पक्षियों की जीवित रहने की दर और अभयारण्यों में उनकी गतिशीलता का मूल्यांकन किया जा सके।
यदि यह पहल सफल रहती है, तो इसे भारत के अन्य संरक्षित क्षेत्रों में दोहराया जा सकता है, जिससे राष्ट्रीय गिद्ध संरक्षण रणनीति को मजबूती मिलेगी।