📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sanket Oswal
विज्ञान
2026 वाइल्डलाइफ वीक में महाराष्ट्र वन विभाग ने वन्यजीव गलियारे को प्रमुख बनाया
✍️ Mid-Day
🗓 05 सित. 2026, 11:33 AM
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महाराष्ट्र वन विभाग ने इस वर्ष के वाइल्डलाइफ वीक में वन्यजीव गलियारों के निर्माण और संरक्षण को प्रमुखता दी, जिससे राज्य में आवासीय कनेक्टिविटी बढ़ेगी।
मुंबई – 2026 के वाइल्डलाइफ वीक के तहत महाराष्ट्र वन विभाग ने वन्यजीव गलियारों और आवासीय कनेक्टिविटी को अपने कार्यक्रम का मुख्य बिंदु बनाया। विभाग ने विभिन्न संगोष्ठियों, फील्ड डेमॉन्स्ट्रेशन और जनजागरूकता अभियानों का आयोजन किया, जिससे जंगल के टुकड़ों को जोड़ने के महत्व को उजागर किया गया।
वर्तमान में चल रहे प्रोजेक्ट्स में तडोबा‑अंधारी टाइगर रिज़र्व और आसपास के वन क्षेत्रों के बीच प्राकृतिक मार्गों को पुनर्स्थापित करना शामिल है। इन गलियारों से जानवरों की आवाजाही आसान होगी, जिससे मानव‑वन्यजीव टकराव कम होगा और प्रजातियों की आनुवंशिक विविधता बढ़ेगी।
स्थानीय NGOs, वन अधिकारी और गांव के प्रतिनिधियों ने कार्यशालाओं में भाग लेकर भूमि‑उपयोग योजना, पारंपरिक ज्ञान की भूमिका और सतत विकास के उपायों पर चर्चा की। विभाग ने कैमरा ट्रैप और जीपीएस टैगिंग के माध्यम से गलियारों की निगरानी के लिए आगे के कदम भी घोषित किए।
यह पहल राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्यों के अनुरूप है और विकास के दबावों के बीच महाराष्ट्र की समृद्ध वन्यजीव विरासत को संरक्षित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
वर्तमान में चल रहे प्रोजेक्ट्स में तडोबा‑अंधारी टाइगर रिज़र्व और आसपास के वन क्षेत्रों के बीच प्राकृतिक मार्गों को पुनर्स्थापित करना शामिल है। इन गलियारों से जानवरों की आवाजाही आसान होगी, जिससे मानव‑वन्यजीव टकराव कम होगा और प्रजातियों की आनुवंशिक विविधता बढ़ेगी।
स्थानीय NGOs, वन अधिकारी और गांव के प्रतिनिधियों ने कार्यशालाओं में भाग लेकर भूमि‑उपयोग योजना, पारंपरिक ज्ञान की भूमिका और सतत विकास के उपायों पर चर्चा की। विभाग ने कैमरा ट्रैप और जीपीएस टैगिंग के माध्यम से गलियारों की निगरानी के लिए आगे के कदम भी घोषित किए।
यह पहल राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्यों के अनुरूप है और विकास के दबावों के बीच महाराष्ट्र की समृद्ध वन्यजीव विरासत को संरक्षित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।