📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / N. Vivekananthamoorthy
बिज़नेस
महाराष्ट्र FDA ने मेडटेक कीमतों की समीक्षा का आह्वान, घरेलू निर्माताओं ने किया स्वागत
✍️ Business Standard
🗓 16 सित. 2026, 09:46 AM
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घरेलू मेडिकल‑टेक कंपनियों ने महाराष्ट्र FDA के उपकरण कीमतों की समीक्षा के आह्वान का स्वागत किया, इसे सस्ती स्वास्थ्य‑सेवा की दिशा में कदम माना।
महाराष्ट्र खाद्य व औषधि प्राधिकरण (Maha FDA) ने राज्य में बेचे जाने वाले मेडिकल उपकरणों की कीमतों की व्यापक समीक्षा का एलान किया है। यह कदम कीमतों को पारदर्शी बनाने और बाजार की वास्तविकताओं के अनुरूप रखने के उद्देश्य से उठाया गया है, जिससे आवश्यक स्वास्थ्य उपकरणों की पहुँच बेहतर हो सके।
घरेलू मेडिकल‑टेक निर्माताओं ने इस पहल का सकारात्मक स्वागत किया, यह कहा कि कीमतों की समीक्षा से अत्यधिक मूल्य निर्धारण को रोकने और उनके उत्पादों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी। उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि यह नियामक की किफायती और गुणवत्ता दोनों को संतुलित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
विश्लेषकों का मानना है कि कीमतों की स्पष्ट रूपरेखा स्थानीय कंपनियों को अनुसंधान एवं विकास में अधिक निवेश करने के लिए प्रेरित कर सकती है, क्योंकि इससे बाजार में अनिश्चितताएँ कम होंगी। Maha FDA ने अभी तक समीक्षा की समयसीमा नहीं बताई है, पर यह कहा है कि प्रक्रिया में हितधारकों से परामर्श शामिल होगा।
यह घोषणा भारत में स्वास्थ्य खर्च को नियंत्रित करने और "Make in India" एजेंडा के तहत स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयासों के बीच आई है। यदि सफल रही, तो यह कीमतों की समीक्षा अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।
घरेलू मेडिकल‑टेक निर्माताओं ने इस पहल का सकारात्मक स्वागत किया, यह कहा कि कीमतों की समीक्षा से अत्यधिक मूल्य निर्धारण को रोकने और उनके उत्पादों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी। उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि यह नियामक की किफायती और गुणवत्ता दोनों को संतुलित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
विश्लेषकों का मानना है कि कीमतों की स्पष्ट रूपरेखा स्थानीय कंपनियों को अनुसंधान एवं विकास में अधिक निवेश करने के लिए प्रेरित कर सकती है, क्योंकि इससे बाजार में अनिश्चितताएँ कम होंगी। Maha FDA ने अभी तक समीक्षा की समयसीमा नहीं बताई है, पर यह कहा है कि प्रक्रिया में हितधारकों से परामर्श शामिल होगा।
यह घोषणा भारत में स्वास्थ्य खर्च को नियंत्रित करने और "Make in India" एजेंडा के तहत स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयासों के बीच आई है। यदि सफल रही, तो यह कीमतों की समीक्षा अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।