📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Government of Maharashtra,India
राजनीति
महाराष्ट्र ने चार लोकायुक्त कारों के लिए 1.32 करोड़ रुपये मंजूर किए
✍️ Business Standard
🗓 29 सित. 2026, 10:02 PM
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महाराष्ट्र सरकार ने लोकायुक्त कार्यालय के लिए चार कारों की खरीद हेतु 1.32 करोड़ रुपये मंजूर किए, जबकि खर्च में कटौती की मांगें जारी हैं।
महाराष्ट्र की राज्य मंत्रिपरिषद ने लोकायुक्त, यानी भ्रष्टाचार विरोधी संस्थान, के लिए चार नई कारों की खरीद हेतु 1.32 करोड़ रुपये की मंजूरी दी। यह खर्च वित्त विभाग की नियमित बैठक में अनुमोदित हुआ, जहाँ अधिकारियों ने राज्य भर में जांच कार्य को सुगम बनाने के लिए विश्वसनीय परिवहन की आवश्यकता बताई।
आदेश के अनुसार प्रत्येक वाहन में मानक सुरक्षा सुविधाएँ होंगी और इन्हें मुंबई स्थित लोकायुक्त कार्यालय में रखकर, अन्य इकाइयों को क्षेत्रीय कार्यालयों में तैनात किया जाएगा। पंजीकरण, प्रारम्भिक रख‑रखाव और खरीद लागत सहित कुल खर्च लगभग 1.32 करोड़ रुपये है।
यह निर्णय उन समय में आया है जब विपक्षी दल और नागरिक संगठनों ने सरकार से खर्च में कटौती और आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देने की माँग की है। आलोचकों का कहना है कि ऐसी राशि को लक्ज़री वस्तुओं पर खर्च करना सरकार द्वारा प्रचारित किफ़ायती नीति के विपरीत है।
लोकायुक्त के प्रतिनिधियों का कहना है कि ये वाहन दूरस्थ जिलों में तेज़ यात्रा के लिए आवश्यक हैं, जिससे सार्वजनिक अधिकारियों की निगरानी और शिकायतों का त्वरित समाधान संभव हो सके। उन्होंने कहा कि यह खरीदारी मानक प्रोक्योरमेंट नियमों के तहत की गई है और किसी भी वित्तीय नियम का उल्लंघन नहीं करती।
यह कदम महाराष्ट्र सरकार को अपने निगरानी संस्थानों की कार्यात्मक जरूरतों को पूरा करने और सार्वजनिक दबाव के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौती को दर्शाता है।
आदेश के अनुसार प्रत्येक वाहन में मानक सुरक्षा सुविधाएँ होंगी और इन्हें मुंबई स्थित लोकायुक्त कार्यालय में रखकर, अन्य इकाइयों को क्षेत्रीय कार्यालयों में तैनात किया जाएगा। पंजीकरण, प्रारम्भिक रख‑रखाव और खरीद लागत सहित कुल खर्च लगभग 1.32 करोड़ रुपये है।
यह निर्णय उन समय में आया है जब विपक्षी दल और नागरिक संगठनों ने सरकार से खर्च में कटौती और आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देने की माँग की है। आलोचकों का कहना है कि ऐसी राशि को लक्ज़री वस्तुओं पर खर्च करना सरकार द्वारा प्रचारित किफ़ायती नीति के विपरीत है।
लोकायुक्त के प्रतिनिधियों का कहना है कि ये वाहन दूरस्थ जिलों में तेज़ यात्रा के लिए आवश्यक हैं, जिससे सार्वजनिक अधिकारियों की निगरानी और शिकायतों का त्वरित समाधान संभव हो सके। उन्होंने कहा कि यह खरीदारी मानक प्रोक्योरमेंट नियमों के तहत की गई है और किसी भी वित्तीय नियम का उल्लंघन नहीं करती।
यह कदम महाराष्ट्र सरकार को अपने निगरानी संस्थानों की कार्यात्मक जरूरतों को पूरा करने और सार्वजनिक दबाव के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौती को दर्शाता है।