📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Pinakpani
विज्ञान
मध्यप्रदेश में वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व में चीतों का तीसरा ठिकाना तैयार
✍️ Amar Ujala · Bhopal
🗓 07 अक्टू. 2026, 07:45 AM
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राज्य आज वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व में दो चीतों को छोड़ने वाला है, जिससे बुंदेलखंड में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
मध्यप्रदेश ने कूनो और गांधीसागर के बाद अपना तीसरा चीतों का ठिकाना तैयार कर लिया है। बुंदेलखंड में स्थित वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व में आज मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में दो चीतों को छोड़ा जाएगा।
यह कदम राज्य की चीतों के पुनरुद्धार और वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा देने की व्यापक योजना का हिस्सा है। अधिकारियों का मानना है कि चीतों की उपस्थिति से प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित किया जाएगा और स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ मिलेगा।
संरक्षण विशेषज्ञों ने बताया कि इस रिज़र्व में उपयुक्त आवास और शिकार की प्रचुरता है, जो इन शिकारियों के दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए आवश्यक है। यह कदम राष्ट्रीय स्तर पर भारत में जंगली चीतों की संख्या बढ़ाने के प्रयासों के साथ भी मेल खाता है, जहाँ वर्तमान में केवल कुछ दर्जन ही चीतें बचे हैं।
दोनों चीतों को प्रजनन कार्यक्रमों से लाया गया है और उन्हें जीपीएस कॉलर से सुसज्जित किया जाएगा, जिससे उनके चलन‑फिरन और स्वास्थ्य की निगरानी की जा सकेगी। आने वाले महीनों में उनके अनुकूलन को बारीकी से देख कर इस पुनर्स्थापन की सफलता का आकलन किया जाएगा।
यदि यह पहल सफल रहती है, तो मध्यप्रदेश चीतों के संरक्षण कार्यक्रम को और विस्तार देने की योजना बना रहा है, जिससे राज्य मध्य भारत में वन्यजीव पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सके।
यह कदम राज्य की चीतों के पुनरुद्धार और वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा देने की व्यापक योजना का हिस्सा है। अधिकारियों का मानना है कि चीतों की उपस्थिति से प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित किया जाएगा और स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ मिलेगा।
संरक्षण विशेषज्ञों ने बताया कि इस रिज़र्व में उपयुक्त आवास और शिकार की प्रचुरता है, जो इन शिकारियों के दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए आवश्यक है। यह कदम राष्ट्रीय स्तर पर भारत में जंगली चीतों की संख्या बढ़ाने के प्रयासों के साथ भी मेल खाता है, जहाँ वर्तमान में केवल कुछ दर्जन ही चीतें बचे हैं।
दोनों चीतों को प्रजनन कार्यक्रमों से लाया गया है और उन्हें जीपीएस कॉलर से सुसज्जित किया जाएगा, जिससे उनके चलन‑फिरन और स्वास्थ्य की निगरानी की जा सकेगी। आने वाले महीनों में उनके अनुकूलन को बारीकी से देख कर इस पुनर्स्थापन की सफलता का आकलन किया जाएगा।
यदि यह पहल सफल रहती है, तो मध्यप्रदेश चीतों के संरक्षण कार्यक्रम को और विस्तार देने की योजना बना रहा है, जिससे राज्य मध्य भारत में वन्यजीव पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सके।