📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gyanendra_Singh_Chau…
अपराध
एमपी हाई कोर्ट ने कहा, आरोपी की भूमिका न बताने वाले FIR को खारिज नहीं किया जा सकता
✍️ Live Law
🗓 30 सित. 2026, 07:01 AM
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एमपी हाई कोर्ट ने कहा कि आरोपी की विशिष्ट भूमिका न बताने वाला FIR खारिज करने का पर्याप्त कारण नहीं है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की एक पीठ ने यह स्पष्ट किया कि प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) में आरोपी की विशिष्ट भूमिका न बताने से वह स्वचालित रूप से खारिज नहीं की जा सकती। यह निर्णय एक याचिका के जवाब में दिया गया था, जिसमें FIR को खारिज करने की मांग की गई थी क्योंकि उसमें आरोपी की सटीक भागीदारी का उल्लेख नहीं था।
कोर्ट ने कहा कि जांच प्रक्रिया और आगे के मुकदमे में प्रत्येक आरोपी की वास्तविक भागीदारी का पता लगाया जा सकता है, और FIR में हुई तकनीकी चूकों से न्याय के मार्ग में बाधा नहीं बननी चाहिए। FIR का मुख्य उद्देश्य जांच को आरम्भ करना है, न कि अंतिम निर्णय देना।
सामान्य FIR को अयोग्य ठहराने के तर्क को खारिज कर यह फैसला यह सिद्धांत मजबूत करता है कि अदालतें केवल FIR की लेखनी की त्रुटियों के आधार पर मामलों को नहीं देख सकतीं, बल्कि वास्तविक सबूतों पर विचार करना चाहिए। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भारत के विभिन्न न्यायक्षेत्रों में FIR को खारिज करने की याचिकाओं के मूल्यांकन पर असर डाल सकता है।
पीठ ने निचली अदालतों को भी निर्देश दिया कि वे FIR की लेखन शैली के बजाय जांच के दौरान एकत्रित साक्ष्यों की गहराई से जांच करें।
कोर्ट ने कहा कि जांच प्रक्रिया और आगे के मुकदमे में प्रत्येक आरोपी की वास्तविक भागीदारी का पता लगाया जा सकता है, और FIR में हुई तकनीकी चूकों से न्याय के मार्ग में बाधा नहीं बननी चाहिए। FIR का मुख्य उद्देश्य जांच को आरम्भ करना है, न कि अंतिम निर्णय देना।
सामान्य FIR को अयोग्य ठहराने के तर्क को खारिज कर यह फैसला यह सिद्धांत मजबूत करता है कि अदालतें केवल FIR की लेखनी की त्रुटियों के आधार पर मामलों को नहीं देख सकतीं, बल्कि वास्तविक सबूतों पर विचार करना चाहिए। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भारत के विभिन्न न्यायक्षेत्रों में FIR को खारिज करने की याचिकाओं के मूल्यांकन पर असर डाल सकता है।
पीठ ने निचली अदालतों को भी निर्देश दिया कि वे FIR की लेखन शैली के बजाय जांच के दौरान एकत्रित साक्ष्यों की गहराई से जांच करें।