📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gyanendrasinghchauha…
अपराध
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने यौन अपराधी पति के साथ रहने की महिला की हाबियस कॉर्पस याचिका खारिज की
✍️ LawBeat
🗓 03 सित. 2026, 01:36 AM
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने यौन अपराध के आरोपों वाले अपने पति के साथ रहने की मांग करने वाली महिला की हाबियस कॉर्पस याचिका को खारिज कर दिया।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की एक बेंच ने एक महिला द्वारा दायर हाबियस कॉर्पस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें वह अपने पति के साथ रहने की अनुमति चाहती थी, जबकि पति पर यौन अपराध का आरोप लगा है। याचिका में यह तर्क दिया गया था कि आपराधिक प्रक्रिया चलने के दौरान भी वैवाहिक सहवास का अधिकार नहीं छीनना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि याचिका ने महिला की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के किसी उल्लंघन को सिद्ध नहीं किया, जो अनुच्छेद 21 के तहत न्यायिक हस्तक्षेप का आधार बनता। साथ ही यह भी कहा गया कि पति के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्रवाई वैवाहिक संबंध से अलग है और याचिका में पर्याप्त कानूनी आधार नहीं है।
खारिजी के बाद महिला को मौजूदा कानूनी प्रतिबंधों के तहत रहना पड़ेगा, और पति के खिलाफ आपराधिक मामला ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगा। दोनों पक्षों ने इस निर्णय पर कोई टिप्पणी नहीं की।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला यह दर्शाता है कि उच्च न्यायालय गंभीर आरोपों, विशेषकर यौन अपराध, के मामलों में व्यक्तिगत स्वतंत्रता के दावों को आपराधिक जांच से अलग रखने में सतर्क रहता है।
कोर्ट ने कहा कि याचिका ने महिला की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के किसी उल्लंघन को सिद्ध नहीं किया, जो अनुच्छेद 21 के तहत न्यायिक हस्तक्षेप का आधार बनता। साथ ही यह भी कहा गया कि पति के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्रवाई वैवाहिक संबंध से अलग है और याचिका में पर्याप्त कानूनी आधार नहीं है।
खारिजी के बाद महिला को मौजूदा कानूनी प्रतिबंधों के तहत रहना पड़ेगा, और पति के खिलाफ आपराधिक मामला ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगा। दोनों पक्षों ने इस निर्णय पर कोई टिप्पणी नहीं की।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला यह दर्शाता है कि उच्च न्यायालय गंभीर आरोपों, विशेषकर यौन अपराध, के मामलों में व्यक्तिगत स्वतंत्रता के दावों को आपराधिक जांच से अलग रखने में सतर्क रहता है।