📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gyanendrasinghchauha…
अपराध
एमपी हाई कोर्ट ने एक दिन में NSA हिरासत को रद्द किया, 11 रिहाई को लंबित बताया
✍️ Live Law
🗓 22 सित. 2026, 06:31 PM
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक दिन में प्रक्रिया की गई NSA हिरासत को रद्द कर दिया और 11 रिहाई को अभी भी लंबित बताया।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत एक दिन में प्रक्रिया की गई हिरासत को रद्द कर दिया, इसे अनियमित बताया। अदालत ने फ़ाइल की जांच कर पाया कि ग्यारह बंदियों की रिहाई का आदेश अभी भी लंबित के रूप में दर्ज है, जिससे प्रक्रिया में चूक का संकेत मिलता है।
कोर्ट ने कहा कि NSA हिरासत की तेज़ प्रक्रिया में सामान्यतः आवश्यक कई सुरक्षा उपाय, जैसे विस्तृत जांच और उचित दस्तावेज़ीकरण, को नजरअंदाज़ किया गया था। जजों ने राज्य अधिकारियों को रिकॉर्ड सुधारने और रिहा किए गए व्यक्तियों को औपचारिक रूप से मुक्त करने का निर्देश दिया।
यह निर्णय मध्य प्रदेश में NSA के प्रयोग पर बढ़ती न्यायिक निगरानी को दर्शाता है, जहाँ इस कानून का उपयोग कई प्रमुख मामलों में किया गया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश समान हिरासतों की पुनः समीक्षा को प्रेरित कर सकता है, ताकि वैध प्रक्रिया सुनिश्चित हो सके।
अदालत ने जेल विभाग को निर्देश दिया कि वह डेटाबेस को अपडेट कर ग्यारह रिहा किए गए व्यक्तियों की सही स्थिति दर्शाए, जिससे उनके लिए आगे कोई कानूनी जटिलता न बने।
आदेश को संबंधित सरकारी विभागों को अगले कुछ दिनों में भेजा जाएगा, और अनुपालन की निगरानी के लिए एक फॉलो‑अप सुनवाई भी निर्धारित की जा सकती है।
कोर्ट ने कहा कि NSA हिरासत की तेज़ प्रक्रिया में सामान्यतः आवश्यक कई सुरक्षा उपाय, जैसे विस्तृत जांच और उचित दस्तावेज़ीकरण, को नजरअंदाज़ किया गया था। जजों ने राज्य अधिकारियों को रिकॉर्ड सुधारने और रिहा किए गए व्यक्तियों को औपचारिक रूप से मुक्त करने का निर्देश दिया।
यह निर्णय मध्य प्रदेश में NSA के प्रयोग पर बढ़ती न्यायिक निगरानी को दर्शाता है, जहाँ इस कानून का उपयोग कई प्रमुख मामलों में किया गया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश समान हिरासतों की पुनः समीक्षा को प्रेरित कर सकता है, ताकि वैध प्रक्रिया सुनिश्चित हो सके।
अदालत ने जेल विभाग को निर्देश दिया कि वह डेटाबेस को अपडेट कर ग्यारह रिहा किए गए व्यक्तियों की सही स्थिति दर्शाए, जिससे उनके लिए आगे कोई कानूनी जटिलता न बने।
आदेश को संबंधित सरकारी विभागों को अगले कुछ दिनों में भेजा जाएगा, और अनुपालन की निगरानी के लिए एक फॉलो‑अप सुनवाई भी निर्धारित की जा सकती है।