📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gyanendra_Singh_Chau…
अपराध
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 14,000 से अधिक पॉक्सो अपीलों पर चिंता जताई, जागरूकता बढ़ाने का आव्हान
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 23 सित. 2026, 08:31 AM
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की तीनों पीठों में पॉक्सो एक्ट की 14,531 आपराधिक अपीलें लंबित हैं, जिससे चीफ जस्टिस अल्पेश वाई. कोगजे और जस्टिस विवेक रूसिया ने व्यापक जागरूकता की मांग की।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को पॉक्सो (Protection of Children from Sexual Offences) एक्ट के तहत दायर 14,531 आपराधिक अपीलों की बड़ी बकाया सूची का सामना करना पड़ रहा है, जो तीनों पीठों में फैली हुई है। यह संख्या नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के बोझ को स्पष्ट करती है।
चीफ जस्टिस अल्पेश वाई. कोगजे और जस्टिस विवेक रूसिया की युगलपीठ ने इस देरी को लेकर चिंता व्यक्त की, यह कहा कि लंबित अपीलें पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए समय पर न्याय प्राप्त करना कठिन बना देती हैं। उन्होंने मामलों के शीघ्र निपटान की आवश्यकता पर बल दिया।
पीपीएसओएक्सओ कानून के प्रति व्यापक जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर पीठ ने जोर दिया, यह कहा कि नागरिकों को इस अधिनियम के बारे में अधिक जानकारी मिलने से शिकायतें बढ़ेंगी और कानूनी कार्रवाई तेज होगी। उन्होंने सामुदायिक स्तर पर सूचना अभियान और मीडिया के माध्यम से शिक्षा को तीव्र करने का प्रस्ताव रखा।
अदालत संभावित प्रक्रियात्मक कदमों, जैसे विशेष पॉक्सो केस सूची या फास्ट‑ट्रैक व्यवस्था, पर विचार कर रही है, ताकि बाल यौन अपराधों से जुड़े मामलों को बिना अनावश्यक देरी के निपटाया जा सके।
चीफ जस्टिस अल्पेश वाई. कोगजे और जस्टिस विवेक रूसिया की युगलपीठ ने इस देरी को लेकर चिंता व्यक्त की, यह कहा कि लंबित अपीलें पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए समय पर न्याय प्राप्त करना कठिन बना देती हैं। उन्होंने मामलों के शीघ्र निपटान की आवश्यकता पर बल दिया।
पीपीएसओएक्सओ कानून के प्रति व्यापक जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर पीठ ने जोर दिया, यह कहा कि नागरिकों को इस अधिनियम के बारे में अधिक जानकारी मिलने से शिकायतें बढ़ेंगी और कानूनी कार्रवाई तेज होगी। उन्होंने सामुदायिक स्तर पर सूचना अभियान और मीडिया के माध्यम से शिक्षा को तीव्र करने का प्रस्ताव रखा।
अदालत संभावित प्रक्रियात्मक कदमों, जैसे विशेष पॉक्सो केस सूची या फास्ट‑ट्रैक व्यवस्था, पर विचार कर रही है, ताकि बाल यौन अपराधों से जुड़े मामलों को बिना अनावश्यक देरी के निपटाया जा सके।