📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / AnonymousUnknown author
शिक्षा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्कूल बसों में ओवरलोडिंग पर फटकार, 190 ड्राइवर लाइसेंस निलंबित
✍️ Amar Ujala · Gwalior
🗓 05 नव. 2026, 09:45 AM
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ग्वालियर में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्कूल वाहनों में ओवरलोडिंग पर प्रशासन को फटकार लगाई, 190 ड्राइवर लाइसेंस निलंबित और 87 वाहनों पर जुर्माना लगाया।
ग्वालियर में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक रिपोर्ट के बाद स्कूल वाहनों में बच्चों को निर्धारित क्षमता से अधिक भरने की समस्या को "भूसे की तरह भरा जाना" कहा और प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कागजी कार्रवाई से अधिक सड़कों पर ठोस सुधार दिखाने का आदेश दिया, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
इस आदेश के तहत ओवरलोडिंग में शामिल 190 ड्राइवरों के लाइसेंस निलंबित किए गए। साथ ही 87 स्कूल बसों को ओवरलोडिंग के उल्लंघन के लिए चालान जारी किए गए। यह कदम नियमों के कड़ाई से पालन को सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।
हाईकोर्ट का यह हस्तक्षेप राज्य में स्कूल परिवहन की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को उजागर करता है। अधिकारियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे कोर्ट के निर्देशों को शीघ्रता से लागू करें और स्कूल बसों को निर्धारित यात्री सीमा का पालन करवाएँ।
यह आदेश तत्काल सुधार के साथ-साथ मध्य प्रदेश में स्कूल परिवहन संचालन की प्रणालीगत निगरानी को भी सुदृढ़ करने का संकेत देता है, जिससे समान उल्लंघनों को रोका जा सके।
अंत में, यह रुख यह याद दिलाता है कि बच्चों की भलाई को सुविधा से ऊपर रखा जाना चाहिए, और नियमों का उल्लंघन करने वाले परिवहन संचालकों को कड़ी कानूनी सज़ा का सामना करना पड़ेगा।
इस आदेश के तहत ओवरलोडिंग में शामिल 190 ड्राइवरों के लाइसेंस निलंबित किए गए। साथ ही 87 स्कूल बसों को ओवरलोडिंग के उल्लंघन के लिए चालान जारी किए गए। यह कदम नियमों के कड़ाई से पालन को सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।
हाईकोर्ट का यह हस्तक्षेप राज्य में स्कूल परिवहन की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को उजागर करता है। अधिकारियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे कोर्ट के निर्देशों को शीघ्रता से लागू करें और स्कूल बसों को निर्धारित यात्री सीमा का पालन करवाएँ।
यह आदेश तत्काल सुधार के साथ-साथ मध्य प्रदेश में स्कूल परिवहन संचालन की प्रणालीगत निगरानी को भी सुदृढ़ करने का संकेत देता है, जिससे समान उल्लंघनों को रोका जा सके।
अंत में, यह रुख यह याद दिलाता है कि बच्चों की भलाई को सुविधा से ऊपर रखा जाना चाहिए, और नियमों का उल्लंघन करने वाले परिवहन संचालकों को कड़ी कानूनी सज़ा का सामना करना पड़ेगा।