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अपराध
एमपी हाईकोर्ट ने कहा, एजेंसी को चार्जशीट दाखिल करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता
✍️ Amar Ujala · Indore
🗓 22 सित. 2026, 07:01 PM
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को निरस्त कर दिया, जिसने 96 लाख रुपये के कथित घोटाले की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज किया था, और कहा कि जांच एजेंसी को अपनी राय के विपरीत चार्जशीट दाखिल करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार को निचली अदालत के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें 96 लाख रुपये के कथित घोटाले की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज किया गया था। कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी को अपनी राय के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, यदि वह मानती है कि सबूतों से अभियोजन का आधार नहीं बनता।
एजेंसी द्वारा दायर क्लोजर रिपोर्ट को ट्रायल कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया था, जिससे एजेंसी ने हाईकोर्ट में राहत की याचिका दायर की। न्यायालय ने अपने निर्णय में जांच की स्वायत्तता और एजेंसी के केस मूल्यांकन का सम्मान करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला आपराधिक जांच के प्रक्रियात्मक चरणों में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाओं को स्पष्ट करता है, जबकि यह भी दर्शाता है कि कोर्ट एजेंसी की रिपोर्ट की पर्याप्तता की समीक्षा कर सकता है। यह निर्णय राज्य में समान मामलों के निपटारे पर प्रभाव डालने की संभावना रखता है।
एजेंसी द्वारा दायर क्लोजर रिपोर्ट को ट्रायल कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया था, जिससे एजेंसी ने हाईकोर्ट में राहत की याचिका दायर की। न्यायालय ने अपने निर्णय में जांच की स्वायत्तता और एजेंसी के केस मूल्यांकन का सम्मान करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला आपराधिक जांच के प्रक्रियात्मक चरणों में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाओं को स्पष्ट करता है, जबकि यह भी दर्शाता है कि कोर्ट एजेंसी की रिपोर्ट की पर्याप्तता की समीक्षा कर सकता है। यह निर्णय राज्य में समान मामलों के निपटारे पर प्रभाव डालने की संभावना रखता है।