📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Secratesuperstar
राजनीति
मध्यप्रदेश विधानसभा 28 अक्टूबर से पेपरलेस, अध्यक्ष तोमर करेंगे उद्घाटन
✍️ Amar Ujala · Bhopal
🗓 24 अक्टू. 2026, 06:47 PM
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मध्यप्रदेश विधानसभा 28 अक्टूबर से प्रश्न, याचिका आदि के लिए पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया अपनाएगी; विधायकों को नेवा प्रशिक्षण मिलेगा और अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर उद्घाटन करेंगे।
मध्यप्रदेश विधानसभा अब पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया अपनाने जा रही है, जिसमें प्रश्न उठाना, ध्यान आकर्षित करना और याचिकाएँ दाखिल करना सभी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से होगा। यह परिवर्तन 28 अक्टूबर से लागू होगा, जब नया इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम चालू किया जाएगा।
विधायकों को इस बदलाव के लिए तैयार करने हेतु 28 से 30 अक्टूबर तक तीन दिन का नेवा (नया इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग और सभा) प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस दौरान सदस्यों को सॉफ़्टवेयर का प्रयोग, दस्तावेज़ इलेक्ट्रॉनिक रूप से जमा करना और रीयल‑टाइम डेटा तक पहुँचने की जानकारी दी जाएगी।
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर इस डिजिटल लॉन्च का औपचारिक उद्घाटन करेंगे, जिससे राज्य की आधुनिकीकरण और विधायी कार्यों की दक्षता बढ़ाने की दिशा में प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है। इस कदम से कागज़ी काम कम होगा, निर्णय‑प्रक्रिया तेज़ होगी और जनता के लिये पारदर्शिता में सुधार होगा।
राज्य अधिकारियों ने बताया है कि यह पेपरलेस सिस्टम मौजूदा आईटी बुनियादी ढाँचे के साथ एकीकृत किया जाएगा, जिससे विधानसभा परिसर में सहज कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी। पूर्ण कार्यान्वयन के बाद, डिजिटल ढाँचा रिकॉर्ड्स तक दूरस्थ पहुँच और सार्वजनिक के लिये लाइव स्ट्रीमिंग की सुविधा भी देगा।
यह पहल भारत में चल रहे ई‑गवर्नेंस प्रयासों के साथ मेल खाती है, जिसका लक्ष्य सार्वजनिक संस्थानों में प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना और संसाधन उपयोग को कम करना है।
विधायकों को इस बदलाव के लिए तैयार करने हेतु 28 से 30 अक्टूबर तक तीन दिन का नेवा (नया इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग और सभा) प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस दौरान सदस्यों को सॉफ़्टवेयर का प्रयोग, दस्तावेज़ इलेक्ट्रॉनिक रूप से जमा करना और रीयल‑टाइम डेटा तक पहुँचने की जानकारी दी जाएगी।
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर इस डिजिटल लॉन्च का औपचारिक उद्घाटन करेंगे, जिससे राज्य की आधुनिकीकरण और विधायी कार्यों की दक्षता बढ़ाने की दिशा में प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है। इस कदम से कागज़ी काम कम होगा, निर्णय‑प्रक्रिया तेज़ होगी और जनता के लिये पारदर्शिता में सुधार होगा।
राज्य अधिकारियों ने बताया है कि यह पेपरलेस सिस्टम मौजूदा आईटी बुनियादी ढाँचे के साथ एकीकृत किया जाएगा, जिससे विधानसभा परिसर में सहज कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी। पूर्ण कार्यान्वयन के बाद, डिजिटल ढाँचा रिकॉर्ड्स तक दूरस्थ पहुँच और सार्वजनिक के लिये लाइव स्ट्रीमिंग की सुविधा भी देगा।
यह पहल भारत में चल रहे ई‑गवर्नेंस प्रयासों के साथ मेल खाती है, जिसका लक्ष्य सार्वजनिक संस्थानों में प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना और संसाधन उपयोग को कम करना है।